पटना : कई छात्र डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना देखते हैं,लेकिन नीट यूजी और जेईई जैसी परीक्षाओं की महंगी कोचिंग फीस कई बार उनकी पहुंच से बाहर होती है. आर्थिक तंगी के कारण कई प्रतिभाशाली छात्रों को अपनी क्षमता के अनुरूप अवसर नहीं मिल पाते,जिसके कारण उन्हें अपने सपनों से समझौता करना पड़ता है. ऐसे में बिहार सरकार ने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बिहार विद्या साथी ऐप के जरिए डिजिटल शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है. इसके माध्यम से छात्र अपनी सुविधा के अनुसार कभी भी और कहीं से भी पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकेंगे.
क्या कहते हैं छात्र और शिक्षक
कक्षा10वीं के छात्र तनिश वर्मा बताते हैं कि जबसे उनके विद्यालय का चयन सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल के रूप में किया गया है. इसके बाद से उनके विद्यालय में शैक्षणिक सुविधाओं को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है. पहले उनके विद्यालय की साइंस लैब में पर्याप्त उपकरण नहीं थे,जिसके कारण वे कई वैज्ञानिक प्रयोग नहीं कर पाते थे. लेकिन अब साइंस लैब में नए-नए उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं. साथ ही,मैथ्स लैब और आईसीटी लैब जैसी सुविधाएं भी मिली हैं,जिससे उन्हें पढ़ाई को बेहतर तरीके से समझने और प्रैक्टिकल के माध्यम से सीखने का अवसर मिल रहा है.
आगे वह बताते हैं कि इसके अलावा बिहार विद्या साथी के माध्यम से उन्हें फिलो ऐप की सुविधा भी दी गई है. इसके माध्यम से किसी भी समय अपने सवालों का समाधान प्राप्त कर सकते हैं. इससे उनकी पढ़ाई और भी आसान हो गई है. अब उन्हें स्कूल के बाद बाहर ट्यूशन लेने की भी जरूरत नहीं है. इससे अभिभावक के पैसे भी बच रहे हैं. वहीं,पिछले दो से ढाई महीनों में उनके विद्यालय में काफी बदलाव आए हैं. उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में उनका विद्यालय और बेहतर बनेगा तथा सभी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त होगी. इसके लिए वह मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं कि उन्होंने उनके विद्यालय को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने की पहल की.
विज्ञान विषय के शिक्षक संजय शरद बताते हैं कि मॉडल स्कूल बनने के बाद उनके विद्यालय में साइंस लैब,कंप्यूटर लैब,खेलकूद और भवन सहित कई सुविधाओं का विस्तार हुआ है. अब छात्र आधुनिक उपकरणों और नई तकनीकों से लैब में अवगत हो रहे हैं,जिससे उन्हें काफी लाभ मिल रहा है. मॉडल स्कूल बनाने के लिए वह मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहते हैं कि उन्होंने ऐसी कल्पना की और इसे हकीकत में तब्दील किया.
वह कहते हैं कि गरीब परिवारों के छात्र पहले कभी ऐसा सपना नहीं देख पाते थे कि उनके विद्यालयों में भी निजी स्कूलों जैसी सुविधाएं होंगी. अब सरकारी स्कूलों में भी ऐसी सुविधाएं उपलब्ध हो रही है. उनके विद्यालय में अब निजी स्कूलों से नाम कटवाकर छात्र पढ़ने के लिए आ रहे हैं. वहीं,विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल रहा है और शिक्षकों को भी पढ़ाने में सहूलियत हो रही है.
38जिलों में700मॉडल स्कूल
प्राप्त जानकारी के मुताबिक,राज्य के38जिलों में700मॉडल विद्यालयों में कक्षा9वीं से12वीं तक के3लाख से ज्यादा विद्यार्थी पढ़ाई में मदद ले रहे हैं. छात्राओं के लिए24x7वन-टू-वन लाइव ट्यूटर की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए75हजार शिक्षक उपलब्ध हैं. वहीं,जेईई और नीट की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए भी सुविधा है. एआई आधारित डिजिटल अध्ययन और प्रैक्टिस सामग्री मुफ्त उपलब्ध है.
