पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान यानी IGIMS में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को लेकर निगरानी व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। संस्थान में एक साल के दौरान दो अलग-अलग मामले सामने आए थे। इनमें इलाज कराने वाले मरीजों से जुड़े 13 करोड़ 89 लाख रुपये से अधिक के दावों का भुगतान नहीं लिया गया, जबकि करीब 45 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला भी सामने आया।
मामलों के बाद IGIMS प्रशासन ने आयुष्मान योजना की पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए नई कार्यसमिति गठित की है। निदेशक प्रो. बिन्दे कुमार की अध्यक्षता में हर शुक्रवार शाम चार बजे समिति की बैठक होगी। इसमें मरीज के पंजीकरण से लेकर इलाज, क्लेम और भुगतान तक की समीक्षा की जाएगी।
नई व्यवस्था में प्रो. संजय कुमार को मुख्य नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। सर्जरी के लिए डॉ. तूलिका सिंह और मेडिसिन के लिए डॉ. अमित कुमार नोडल पदाधिकारी होंगे। चिकित्सा, वित्त, फार्मेसी और तकनीकी विभाग के अधिकारियों को भी समिति में शामिल किया गया है।
कैग ने नवंबर 2025 में 13 करोड़ 89 लाख 47 हजार 358 रुपये के प्रतिपूर्ति दावे नहीं किए जाने को लेकर आपत्ति उठाई थी। वहीं करीब 45 लाख रुपये की कथित अनियमितता के मामले में शास्त्रीनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
अब आयुष्मान मरीजों के भर्ती से डिस्चार्ज तक के रिकॉर्ड का मिलान होगा। HIMS और आयुष्मान पोर्टल के आंकड़ों की भी जांच की जाएगी। इलाज की पुष्टि के बाद ही क्लेम और लंबित भुगतान की नियमित समीक्षा की जाएगी।
बिहार से वरिष्ठ संवाददाता संजय कुमार की रिपोर्ट

