गया/बोधगया:विश्व शांति और मानव कल्याण की मंगलकामना के साथ बिहार के बोधगया स्थित विश्व प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर परिसर में भव्य महाकठिन चीवरदान समारोह का आयोजन किया गया। पवित्र बोधिवृक्ष के नीचे आयोजित इस धार्मिक समारोह में एक हजार से अधिक बौद्ध भिक्षुओं को चीवर और दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री दान की गई। थाईलैंड की ओर से आयोजित इस समारोह में कई देशों के बौद्ध भिक्षु, श्रद्धालु और गणमान्य अतिथि शामिल हुए।

तीन महीने के पवित्र वर्षावास काल की समाप्ति के बाद बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति (BTMC) के तत्वावधान में इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन हुआ। समारोह में थाईलैंड, वियतनाम, लाओस, श्रीलंका, कंबोडिया और म्यांमार सहित कई देशों से बौद्ध भिक्षु और श्रद्धालु पहुंचे। थाईलैंड की पूर्व प्रधानमंत्री की पत्नी सहित कई विशिष्ट अतिथियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

एक हजार से अधिक बौद्ध भिक्षुओं को किया गया चीवरदान
महाबोधि मंदिर परिसर में पवित्र बोधिवृक्ष के नीचे धार्मिक परंपराओं के अनुसार महाकठिन चीवरदान समारोह संपन्न हुआ। इस दौरान एक हजार से अधिक बौद्ध भिक्षुओं को चीवर यानी वस्त्र के साथ दैनिक उपयोग की अन्य आवश्यक सामग्री भेंट की गई। चीवर ग्रहण करने के बाद बौद्ध भिक्षुओं ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया और पूरी दुनिया में शांति, सद्भाव तथा मानव कल्याण की मंगलकामना की। विभिन्न देशों से आए श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।

बोधगया में विश्व शांति के लिए विशेष पूजा, पवित्र बोधिवृक्ष के नीचे 1000 से अधिक भिक्षुओं को महाकठिन चीवरदानभगवान बुद्ध के समय से चली आ रही है कठिन चीवरदान की परंपरा
इस अवसर पर महाबोधि मंदिर के केयरटेकर भिक्षु डॉ. दिनानंद भंते ने महाकठिन चीवरदान के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि भगवान बुद्ध के समय से ही कठिन चीवरदान की परंपरा चली आ रही है। बौद्ध धर्म में तीन महीने का वर्षावास अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान भिक्षु एक ही स्थान पर रहकर साधना, तपस्या और धार्मिक नियमों का पालन करते हैं। वर्षावास की समाप्ति के बाद श्रद्धालु बौद्ध भिक्षुओं को चीवर यानी वस्त्र और अन्य आवश्यक सामग्री दान करते हैं। इसी धार्मिक परंपरा को कठिन चीवरदान कहा जाता है।

त्याग, समर्पण और श्रद्धा का प्रतीक है यह आयोजन
भिक्षु डॉ. दिनानंद भंते ने बताया कि कठिन चीवरदान केवल वस्त्र दान करने की परंपरा नहीं है, बल्कि यह त्याग, समर्पण, श्रद्धा और सेवा भावना का प्रतीक है। इसके माध्यम से श्रद्धालु बौद्ध संघ के प्रति अपनी आस्था और सम्मान प्रकट करते हैं।

बोधगया में विश्व शांति के लिए विशेष पूजा, पवित्र बोधिवृक्ष के नीचे 1000 से अधिक भिक्षुओं को महाकठिन चीवरदान
कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
समारोह में एडीएम सह बीटीएमसी प्रभारी पारितोष कुमार सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान महाबोधि मंदिर परिसर में बौद्ध धर्म की परंपराओं, आध्यात्मिक आस्था और विश्व शांति के संदेश की गूंज सुनाई देती रही। बोधगया की पवित्र धरती पर आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय धार्मिक समारोह ने एक बार फिर दुनिया को शांति, करुणा, मैत्री और मानव कल्याण का संदेश दिया।

बोधगया से मनोज सिंह की रिपोर्ट