पूर्णिया: जी. डी. गोयनका पब्लिक स्कूल,पूर्णिया के सभागार में शनिवार को 4 दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का भव्य समापन हुआ. यह कार्यशाला 25 जून से 28 जून तक आयोजित की गई थी,जिसमें विद्यालय के समस्त शिक्षकों ने भाग लिया और आधुनिक शिक्षण विधियों,मूल्यांकन प्रक्रियाओं तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मूल अवधारणाओं पर गहन ज्ञान प्राप्त किया.

पूर्णिया के जी. डी. गोयनका पब्लिक स्कूल में ज्ञानवर्धक शिक्षक कार्यशाला का हुआ सफल समापन

कार्यशाला के प्रथम दो दिवसों में विद्यालय की निदेशिका एवं प्रधानाचार्य पुलोमा नंदी जी ने ब्लूम टैक्सोनॉमी,क्वेश्चन फ्रेमिंग की कला,कक्षा प्रबंधन एवं समय प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सत्र लिए. उनका प्रशिक्षण न केवल शिक्षकों के व्यावसायिक कौशल को उन्नत करने वाला रहा,बल्कि उनकी कक्षाओं में प्रभावशीलता और नवाचार को भी प्रेरित करने वाला सिद्ध हुआ.

पूर्णिया के जी. डी. गोयनका पब्लिक स्कूल में ज्ञानवर्धक शिक्षक कार्यशाला का हुआ सफल समापन

अंतिम दो दिनों में सीबीएसई से आमंत्रित विशेषज्ञ मांडवी त्रिपाठी एवं हेमा कलाकोटी द्वारा मूल्यांकन एवं आकलन की प्रक्रिया को सुदृढ़ करने पर केंद्रित गहन सत्र संचालित किए गए. डायग्नोस्टिक,फॉर्मेटिव,समेटिव एवं इंटरिम मूल्यांकन की अवधारणाओं पर विस्तार से चर्चा की गई,जिससे शिक्षकों कोHOTS (Higher Order Thinking Skills)एवंLOTS (Lower Order Thinking Skills)आधारित प्रश्नपत्रों के निर्माण की विधि में दक्षता प्राप्त हुई.

पूर्णिया के जी. डी. गोयनका पब्लिक स्कूल में ज्ञानवर्धक शिक्षक कार्यशाला का हुआ सफल समापन

इस ज्ञानपूर्ण प्रशिक्षण में शिक्षकों को न केवल मूल्यांकन की तकनीकी समझ प्रदान की गई,बल्कि यह भी बताया गया कि किस प्रकार पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों से आगे बढ़ते हुए कक्षा को रुचिकर,संवादात्मक एवं उद्देश्यपूर्ण बनाया जा सकता है.

पूर्णिया के जी. डी. गोयनका पब्लिक स्कूल में ज्ञानवर्धक शिक्षक कार्यशाला का हुआ सफल समापन

कार्यशाला के समापन के अवसर पर विद्यालय के उप-प्रधानाचार्य राजकुमार दास,वरिष्ठ शैक्षणिक समन्वयक त्रिवेणी प्रसाद पांडेय एवं विद्यालय के समस्त शिक्षकगण उपस्थित रहे.

विद्यालय परिवार की ओर से सम्माननीय अध्यक्ष डॉ. पीयूष अग्रवाल,उपाध्यक्ष शैलेन्द्र गुप्ता एवं निदेशक-प्रधानाचार्य पुलोमा नंदी जी के प्रति विशेष आभार प्रकट किया गया,जिनके दूरदर्शी नेतृत्व एवं सतत समर्थन के बिना यह आयोजन संभव नहीं हो पाता.

यह कार्यशाला केवल एक प्रशिक्षण नहीं,बल्कि शिक्षा को पुनर्परिभाषित करने की एक प्रेरक पहल थी–जहां हर शिक्षक को एक सशक्त मार्गदर्शक के रूप में विकसित होने का अवसर प्राप्त हुआ. ज्ञान और प्रेरणा से ओतप्रोत होकर,हम अब और भी दृढ़ संकल्पित हैं कि हर कक्षा को नवाचार,जागरूकता और उत्कृष्टता का केंद्र बनाएँ.