पटना:बिहार की राजनीति में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार इन दिनों अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। सार्वजनिक कार्यक्रमों से लेकर अस्पतालों के निरीक्षण तक उनकी मौजूदगी का एक अलग अंदाज देखने को मिल रहा है। खास तौर पर मरीजों से सीधे संवाद करना और मौके पर सामने आई समस्याओं पर अधिकारियों को निर्देश देना उनकी सार्वजनिक छवि का अहम हिस्सा बनता जा रहा है।

अस्पतालों के निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य मंत्रीनिशांत कुमार कई बार वार्डों में जाकर मरीजों से उनकी परेशानी पूछते नजर आए हैं। पटना के एलएनजेपी अस्पताल के निरीक्षण में उन्होंने मरीजों से दवाओं, जांच और इलाज से जुड़ी शिकायतें सुनीं और अधिकारियों को व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए। सीतामढ़ी में भी औचक निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और सामने आई कमियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए।सादगी,संवाद और एक्शन की छवि से पहचान बनाने की कोशिश,समस्याओं पर अधिकारियों को दिया निर्देश

उनकी कार्यशैली में संवाद और मौके पर जाकर स्थिति समझने पर जोर दिखाई देता है। यही वजह है कि समर्थक उनके इस अंदाज को सक्रिय राजनीति से जोड़कर देखते हैं, जबकि उनके राजनीतिक सफर का मूल्यांकन अभी जारी प्रक्रिया है।

हाल के दिनों में निशांत कुमार की जदयू की गतिविधियों में भी सक्रियता बढ़ी है। 18 सितंबर को उन्होंने पार्टी के कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं और विधानमंडल सदस्यों के बीच अपनी बात रखी। उन्होंने नीतीश कुमार की राजनीतिक सोच और शासन मॉडल को आगे बढ़ाने की बात कही।

बापू सभागार के महिला आयोग के कार्यक्रम में उनके नाम पर लगे नारों ने भी उनकी सार्वजनिक मौजूदगी को चर्चा में ला दिया। हालांकि इन नारों को राजनीतिक समर्थन का निश्चित पैमाना मानने के बजाय कार्यक्रम में मौजूद लोगों की प्रतिक्रिया के रूप में देखना अधिक उचित होगा।

निशांत कुमार की पहचान फिलहाल एक ऐसे युवा चेहरे के तौर पर बन रही है, जो राजनीति में अपनी जगह संवाद, सक्रियता और कामकाज के जरिए बनाने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले समय में उनकी राजनीतिक भूमिका किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह उनकी निरंतर सार्वजनिक और संगठनात्मक सक्रियता से स्पष्ट होगा।

बिहार से वरिष्ठ संवाददाता संजय कुमार की रिपोर्ट