रांचीः झारखंड में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और कथित तौर पर वोटरों के नाम काटे जाने के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने इस मामले को लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी,झारखंड और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को दो अलग-अलग पत्र लिखे हैं। पत्रों में मतदाता सूची से जुड़े कई गंभीर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए हैं। प्रदीप यादव ने राहुल गांधी की चुनौती स्वीकार कर इस मुद्दे पर खुली बहस करने की मांग की है।

10लोगों के नाम बताने की चुनौती पर प्रदीप यादव का पलटवार
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को लिखे पत्र में प्रदीप यादव ने मतदाता सूची से नाम कटने को लेकर दिए गए एक बयान पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को10ऐसे लोगों के नाम बताने की चुनौती दी गई थी,जिनके नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं।

प्रदीप यादव ने कहा कि जब तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित नहीं होती,तब तक नाम कटने या नहीं कटने का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अधूरी प्रक्रिया के आधार पर किसी राजनीतिक दल को गलत साबित करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही अभी नाम नहीं कटे हों,लेकिन करीब1करोड़7लाख मतदाता इस आशंका में हैं कि कहीं उनका नाम मतदाता सूची से हटा न दिया जाए।

2.64करोड़ मतदाताओं में44लाख से अधिक की स्थिति पर सवाल
प्रदीप यादव ने अपने पत्र में मतदाता सूची के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में करीब2करोड़64लाख मतदाता हैं,जबकि लगभग44लाख मतदाताओं के संबंध में अलग से सूचनाएं या प्रक्रियागत कार्रवाई सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कई स्तरों पर गड़बड़ियां हो रही हैं। उनके अनुसार,इसके पीछे राजनीतिक उद्देश्य से विरोधी विचारधारा वाले मतदाताओं को सूची से बाहर करने की साजिश हो सकती है।

सरैयाहाट और मुफस्सिल क्षेत्र के उदाहरण देकर उठाए सवाल
प्रदीप यादव ने अपने पत्र में सरैयाहाट और मुफस्सिल क्षेत्र के दो उदाहरणों का उल्लेख किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन क्षेत्रों में मतदाता सूची से संबंधित फॉर्म गलत तरीके से जमा किए गए हैं। उन्होंने कहा किSDD की सूची में शामिल नामों को लेकर जो चुनौती दी गई थी, उसमें करीब पांच प्रतिशत लोगों का मामला सामने आया है। उन्होंने पौड़ेयाहाट की सरिता देवी का उदाहरण देते हुए भी मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। प्रदीप यादव ने यह भी कहा कि पुराने मतदाताओं के सामने फॉर्म-6 भरने जैसी प्रक्रियाओं को लेकर भ्रम और परेशानी की स्थिति पैदा हो रही है।

एक साल की सजा के प्रावधान का भी किया जिक्र
मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में गलत जानकारी देने और नियमों के उल्लंघन से जुड़े कानूनी प्रावधानों का उल्लेख करते हुए प्रदीप यादव ने जनप्रतिनिधित्व कानून और मतदाता पंजीकरण नियमावली का हवाला दिया। उन्होंने विशेष रूप से मतदाता पंजीकरण नियमावली1960 के नियम21 का उल्लेख करते हुए कहा कि अनजाने में छूटे नामों को मतदाता सूची में शामिल करने का प्रावधान है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और आम मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाने की मांग की।

अमित शाह को लिखे पत्र में लोकतंत्र और चुनाव आयोग पर सवाल
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में प्रदीप यादव ने लोकतंत्र की स्थिति और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोकतंत्र बचाने की बात करने वाली भाजपा की सरकार के कार्यकाल में लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता प्रभावित हुई है। उन्होंने ईडी, सीबीआई, भारतीय रिजर्व बैंक और न्यायपालिका जैसी संस्थाओं को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। प्रदीप यादव ने कहा कि लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण अधिकार मतदान का अधिकार है और यदि मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाने की आशंका पैदा होती है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है।

चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और नियमों में बदलाव पर भी सवाल
प्रदीप यादव ने अपने पत्र में चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और चुनाव आयुक्तों को कानूनी संरक्षण देने से संबंधित प्रावधानों पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को लेकर बनाए गए नए कानूनी प्रावधानों से उसकी जवाबदेही प्रभावित हुई है। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश और अन्य संवैधानिक पदों की भूमिका में बदलाव तथा चुनाव आयुक्तों को दिए गए संरक्षण का मुद्दा भी उठाया।

बंगाल,उत्तर प्रदेश और हरियाणा के मामलों का दिया हवाला
प्रदीप यादव ने अपने पत्र में पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से जुड़े कुछ मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में करीब48 लाख41 हजार लोगों ने न्यायाधिकरण के समक्ष अपना पक्ष रखा, लेकिन उनके अनुसार एक लाख से भी कम लोगों को राहत मिल पाई। उन्होंने उत्तर प्रदेश के एक मामले का जिक्र करते हुए मतदाता सूची में करीब10 हजार नामों में बदलाव और एक एसडीएम के निलंबन का दावा किया।

वहीं, हरियाणा के फरीदाबाद की दो विधानसभा सीटों से जुड़े मामले में उन्होंने चुनावी फुटेज और कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया। इन सभी उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।

राहुल गांधी की चुनौती स्वीकार कर खुली बहस करे भाजपा- प्रदीप यादव
प्रदीप यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से आग्रह किया कि लोकतंत्र और मताधिकार से जुड़े सवालों पर केवल राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय खुली बहस होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की ओर से उठाए गए सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। भाजपा को चुनौती स्वीकार कर तथ्यों के आधार पर बहस करनी चाहिए और अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। प्रदीप यादव ने कहा कि कांग्रेस लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी।

रांची से करिश्मा सिन्हा की रिपोर्ट