झारखंड में उच्च शिक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने रांची विश्वविद्यालय के लिए कुल 1353 शिक्षक पदों और 1200 से अधिक गैर-शिक्षक पदों की स्वीकृति दे दी है। इस संशोधित अधिसूचना के तहत विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ाई और संसाधनों की तस्वीर काफी हद तक बदलने वाली है।

राज्य सरकार द्वारा जारी नई अधिसूचना के मुताबिक, रांची विश्वविद्यालय के लिए कुल 1353 पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति होगी। इनमें:

  • प्रोफेसर के 42 पद

  • एसोसिएट प्रोफेसर के 153 पद

  • और असिस्टेंट प्रोफेसर के 1158 पद शामिल हैं।

इसके अलावा, विश्वविद्यालय के लिए 53 अधिकारी और 1098 कर्मचारी भी स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही, आउटसोर्सिंग के जरिए 735 कर्मियों की नियुक्ति होगी, जिसमें डिजिटल लैंग्वेज लैब इंस्ट्रक्टर और विभिन्न स्किल्ड व अनस्किल्ड मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS) के पद शामिल हैं।

सरकार ने अंगीभूत कॉलेजों में उपलब्ध बुनियादी ढांचे के आधार पर पीजी (Post Graduation) की पढ़ाई जारी रखने और वोकेशनल कोर्स संचालित करने की पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय को सौंप दी है। हालांकि, बिरसा कॉलेज को छोड़कर अन्य कॉलेजों में विद्यार्थियों की सीटें कुछ कम की गई हैं।

राज्य सरकार ने कॉलेजों में छात्र-संख्या के आधार पर शिक्षकों के पद तय किए हैं। आइए नजर डालते हैं कुछ प्रमुख कॉलेजों के आंकड़ों पर:

  • मारवाड़ी कॉलेज: 2,940 विद्यार्थियों के लिए 61 शिक्षक

  • डोरंडा कॉलेज: 2,340 विद्यार्थियों के लिए 74 शिक्षक

  • रांची वीमेंस कॉलेज: 2,760 विद्यार्थियों के लिए 104 शिक्षक

  • एसएस मेमोरियल कॉलेज: 2,820 विद्यार्थियों के लिए 64 शिक्षक

  • केओ कॉलेज गुमला: 3,000 विद्यार्थियों के लिए 82 शिक्षक

इसके अलावा, आरएलएसवाई कॉलेज, बेड़ो, बुंडू, मांडर, लोहरदगा, खूंटी और सिमडेगा समेत सभी मॉडल कॉलेजों में भी छात्र-संख्या के अनुपात में पद स्वीकृत किए गए हैं। वहीं, स्नातकोत्तर (पीजी) विभागों के कुल 3,660 सीटों के लिए 223 शिक्षकों के पद निर्धारित किए गए हैं।

हालांकि, जानकारों का कहना है कि इन आंकड़ों से अलग-अलग कॉलेजों में विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात (Student-Teacher Ratio) में अंतर साफ झलकता है; जैसे कम छात्रों वाले डोरंडा कॉलेज में अधिक शिक्षक हैं, जबकि अपेक्षाकृत अधिक छात्रों वाले मारवाड़ी कॉलेज में शिक्षकों के पद कम हैं।