किसी विकसित राज्य या राष्ट्र की राह गांवों की समृद्धि और युवाओं की सक्रिय भागीदारी से होकर गुजरती है। जब तक जमीन से जुड़े बुनियादी बदलाव नहीं आते, तब तक समग्र विकास का सपना पूरा नहीं हो सकता। इसी सोच के साथ बिहार सरकार ग्रामीण युवाओं और छात्रों के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कर रही है। इनमें ग्राम पंचायतों में ‘पंचायत ज्ञान केंद्र’ या डिजिटल पुस्तकालय खोलने जैसी योजनाएं शामिल हैं।ग्रामीण छात्रों के लिए पुस्तकालय इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां उन्हें बिना किसी आर्थिक खर्च के पढ़ाई के लिए जरूरी किताबें, शांत वातावरण और अध्ययन के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर महंगी पाठ्यपुस्तकों, पत्र-पत्रिकाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी अध्ययन सामग्री का अभाव होता है। ऐसे में पुस्तकालय इन जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

बिहार सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और पठन-पाठन का माहौल उपलब्ध कराने के लिए हर पंचायत में ‘पंचायत ज्ञान केंद्र’ (पुस्तकालय) खोले जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों में स्थापित पंचायत ज्ञान केंद्र एवं पुस्तकालय अब ग्रामीण युवाओं और विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई, ज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के महत्वपूर्ण केंद्र बन रहे हैं। इनके माध्यम से गांव के विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में शहरों जैसी अध्ययन सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकों और अध्ययन सामग्री का लाभ उठाकर ग्रामीण क्षेत्र के होनहार विद्यार्थी अपने सपनों को नई दिशा दे रहे हैं और सफलता की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

कटिहार जिले के मनिहारी प्रखंड अंतर्गत दिलारपुर पंचायत में भी ऐसा ही पुस्तकालय संचालित है। यहां ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र-छात्राएं शांत वातावरण में बैठकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। इस पहल से उन विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिल रहा है, जो घर की व्यस्तता या सीमित सुविधाओं के कारण ठीक से पढ़ाई नहीं कर पाते थे। पुस्तकालय में विभिन्न विषयों की पुस्तकें और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन के लिए बेहतर वातावरण मिल रहा है और वे अपनी तैयारी को अधिक प्रभावी तरीके से आगे बढ़ा पा रहे हैं।पंचायत स्तर पर विकसित हो रहे ये ज्ञान केंद्र ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए केवल पुस्तकालय नहीं, बल्कि पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर बन रहे हैं। गांव में ही अध्ययन की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होने से ग्रामीण युवाओं को अपने सपनों को पूरा करने के लिए शहरों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है।

सुनिए विद्यार्थियों ने क्या कहा

कटिहार के दिलारपुर पंचायत का पुस्तकालय बना ग्रामीण छात्रों का सहारा

ममता कुमारी ने कहा कि यहां का पुस्तकालय बहुत अच्छा है। मैं प्रतिदिन अपने घर से यहां पढ़ने आती हूं। घर पर घरेलू कामों की वजह से पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल नहीं मिल पाता है, लेकिन यहां आकर बिना किसी बाधा के जितनी देर चाहें, पढ़ाई कर सकते हैं। यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए किताबें और अन्य जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। अगर इसी तरह की सुविधाएं मिलती रहीं, तो एक दिन सफलता जरूर मिलेगी।”

कटिहार के दिलारपुर पंचायत का पुस्तकालय बना ग्रामीण छात्रों का सहारा

मनीष कुमार का कहना है कि “बिहार सरकार की इस पहल से हम ग्रामीण बच्चों को पुस्तकालय में पढ़ाई की बहुत अच्छी सुविधा मिल रही है। घर पर जिस तरह पढ़ाई नहीं हो पाती थी, वह यहां आसानी से हो जाती है। मैं रेलवे की तैयारी कर रहा हूं और पिछले छह महीने से यहां लगातार पढ़ाई कर रहा हूं। इससे मुझे काफी मदद मिली और मैंने सीबीटी (CBT) परीक्षा भी क्वालीफाई कर ली है।वहीं सोनू कुमार कहते है कि “हमारे यहां जो ज्ञान केंद्र (पुस्तकालय) खुला है, वह घर की तुलना में पढ़ाई के लिए बहुत ही अनुकूल है। यहां हमें शांत वातावरण के साथ पर्याप्त संख्या में किताबें भी मिलती हैं। इससे हम नियमित रूप से अपनी पढ़ाई जारी रख पा रहे हैं।”

कटिहार के दिलारपुर पंचायत का पुस्तकालय बना ग्रामीण छात्रों का सहारा