कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर छात्रवृत्ति,आंबेडकर आवास योजना औरPESAकानून को लेकर उठाए सवाल, 29नवंबर को आदिवासी-दलित समाज की महाबैठक का ऐलान
रांची: झारखंड के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता बंधु तिर्की ने अनुसूचित जाति (SC)और अनुसूचित जनजाति (ST)के लिए संचालित योजनाओं को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार दलितों और आदिवासियों के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं के बजट में कटौती कर रही है। उन्होंने छात्रवृत्ति,आवास योजना और आदिवासी अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाते हुए कहा कि इससे समाज के वंचित वर्गों को नुकसान हो रहा है।
SC-STयोजनाओं के बजट में कटौती का आरोप
बंधु तिर्की ने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए निर्धारित सब-प्लान के बजट में कमी की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि अनुसूचित जनजाति के लिए बनाई गई34उपयोजनाओं के बजट में पूर्ववर्ती सरकार की तुलना में करीब50प्रतिशत की कटौती की गई है।
उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य आदिवासी और दलित समाज को शिक्षा,आवास और अन्य बुनियादी सुविधाओं के माध्यम से आगे बढ़ने का अवसर देना है। ऐसे में बजट में कटौती से इन वर्गों के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
छात्रवृत्ति और निःशुल्क कोचिंग पर उठाए सवाल
पूर्व मंत्री ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों की प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रवृत्ति का भुगतान बाधित होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
बंधु तिर्की ने विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति और निःशुल्क कोचिंग के लिए निर्धारित प्रावधानों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं के प्रभावित होने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के सामने शिक्षा जारी रखने की चुनौती खड़ी हो सकती है।
हालांकि,इन योजनाओं के बजट,भुगतान और वर्तमान स्थिति से जुड़े आरोपों की आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर पुष्टि होना बाकी है।
आंबेडकर आवास योजना बंद होने का दावा
बंधु तिर्की ने अनुसूचित जाति के लोगों के लिए संचालित आंबेडकर आवास योजना का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि योजना बंद होने से दलित समाज के जरूरतमंद परिवारों को आवास का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने कहा कि आवास जैसी बुनियादी जरूरत से जुड़ी योजनाओं का प्रभावित होना वंचित समुदायों की मुश्किलें बढ़ा सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इससे संविधान के तहत मिले अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
PESAकानून के क्रियान्वयन पर भी जताई चिंता
प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व मंत्री ने पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम यानीPESAकानून का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कानून के तहत आदिवासी समुदायों को दिए गए अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।
बंधु तिर्की ने कहा कि झारखंड के साथ छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भी आदिवासी अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर गंभीर स्थिति है। मध्य प्रदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के धरने पर बैठने की घटना का हवाला दिया।
29नवंबर को आदिवासी-दलित समाज की महाबैठक
बंधु तिर्की ने घोषणा की कि इन सभी मुद्दों को लेकर29नवंबर को आदिवासी-दलित समाज की महाबैठक आयोजित की जाएगी। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़े लोगों के अधिकारों,छात्रवृत्ति,आवास,शिक्षा और सरकारी योजनाओं की स्थिति पर चर्चा की जाएगी।
उन्होंने कहा कि इन समुदायों के हितों और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े सवालों को व्यापक स्तर पर उठाने की जरूरत है।
प्रेस वार्ता में बंधु तिर्की ने केंद्र सरकार सेSC-STसमुदायों के लिए संचालित योजनाओं की स्थिति स्पष्ट करने और उनके लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने की मांग की। अब देखना होगा कि इन आरोपों और मांगों पर केंद्र सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
रांची से राहुल कुमार की रिपोर्ट

