शिव भक्ति का दिव्य पर्व : हरियाली और उत्सव का पावन महीना सावन
हिंदू धर्म में सावन 'श्रावण' का महीना अत्यंत पवित्र माना जाता है। सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि सावन में श्रद्धापूर्वक भगवान शिव पूजा, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और व्रत करने से भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय निकले विष को भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। इसके बाद देवताओं ने उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए जल अर्पित किया। तभी से सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा प्रचलित मानी जाती है।
इस महीने में सोमवार का विशेष धार्मिक महत्व होता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, शिव मंदिरों में जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग और फल अर्पित करते हैं। अविवाहित युवक-युवतियां योग्य जीवनसाथी की कामना से व्रत रखते हैं, जबकि विवाहित महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु के लिए भगवान शिव का पूजन करती हैं।सावन के दौरान लाखों शिवभक्त पवित्र नदियों से जल लेकर पैदल यात्रा करते हुए शिव मंदिरों तक पहुंचते हैं। इस यात्रा को कांवड़ यात्रा कहा जाता है। श्रद्धालु बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष के साथ भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं।
सावन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि प्रकृति के लिए भी विशेष महत्व रखता है। इस मौसम में चारों ओर हरियाली छा जाती है, नदियां और तालाब भर जाते हैं तथा वातावरण मनमोहक हो जाता है। इसलिए यह महीना पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण का संदेश भी देता है।सावन हमें भक्ति, आस्था, संयम, सेवा और प्रकृति के प्रति प्रेम का संदेश देता है। यह महीना केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन में सकारात्मकता, संतुलन और पर्यावरण संरक्षण का भी प्रेरक है।
कशिश न्यूज़ डिजिटल डेस्क, पटना





