
रविवार, 18 अक्टूबर 2026
Liveआरा : इस वक्त की बड़ी खबर बिहार के भोजपुर से है जहां नवरात्रि की धूम के बीच जिले से एक हृदय विदारक घटना सामने आई है. संदेश थाना क्षेत्र के तीर्थ कौल गांव के पास शनिवार को सोन नदी में नहाने के दौरान डूबने से 3 बच्चों समेत 4 लोगों की मौत हो गई. घटना से पूरे गांव में शोक की लहर है. मृतकों के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है.प्राप्त जानकारी के अनुसार, तीन बच्चे सोन नदी में नहाने के दौरान गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे. बच्चों को डूबता देख लगभग25वर्षीय एक युवक उन्हें बचाने के लिए नदी में कूद पड़ा. हालांकि, पानी की गहराई अधिक होने के कारण वह भी डूब गया. इस प्रकार तीन बच्चों को बचाने के प्रयास में युवक की भी जान चली गई.घटना के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई. स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस और प्रशासन को इसकी सूचना दी. सूचना मिलते ही पुलिस एवं प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची. काफी मशक्कत के बाद नदी से चारों के शव बरामद किए गए. हादसे की खबर फैलते ही मृतकों के स्वजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए.मृतकों में10से15वर्ष की आयु के तीन बच्चे और लगभग25वर्षीय एक युवक शामिल है. मृतकों की विस्तृत पहचान की जानकारी अब तक सामने नहीं आई है.हादसे की गंभीरता को देखते हुए संदेश प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) बिनेश कुमार और संदेश थानाध्यक्ष संजीव कुमार घटनास्थल पर मौजूद रहकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.सोन नदी में हुए इस दर्दनाक हादसे ने चार परिवारों की खुशियां छीन ली. जिन घरों में कुछ समय पहले तक सामान्य माहौल था, वहां अब चीख-पुकार मची हुई है. एक साथ चार लोगों की मौत से तीर्थ कौल गांव और आसपास के क्षेत्रों में मातम पसरा हुआ है. नवरात्रि के उत्सवी माहौल के बीच हुई इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है.आरा से विवेक कुमार सिंह की रिपोर्ट
पटना : राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर 90 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा. श्री दशहरा कमिटी ट्रस्ट की ओर से आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम की तैयारियां जोर-शोर से चल रही है. लगातार 71 वर्षों से चली आ रही रावण दहन की परंपरा इस बार भी भव्य रूप में देखने को मिलेगी. आयोजन को लेकर ट्रस्ट के अध्यक्ष कमल निपानी और अरुण कुमार समेत कमेटी के सदस्यों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विस्तृत जानकारी दी.देश का दूसरा सबसे ऊंचा रावण बनाने की तैयारीआयोजकों के मुताबिक, इस बार90फीट ऊंचा रावण का पुतला आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेगा. पुतले के निर्माण की जिम्मेदारी आगरा की टीम को दी गई है. बारिश से पुतले को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए निर्माण में स्टील पाइप का इस्तेमाल किया जा रहा है. आयोजन समिति का प्रयास है कि इस बार भी रावण दहन कार्यक्रम को भव्य और यादगार बनाया जाए.आधे घंटे तक होगी इको-फ्रेंडली आतिशबाजीरावण दहन के बाद दर्शकों के लिए करीब आधे घंटे तक इको-फ्रेंडली आतिशबाजी की व्यवस्था की जाएगी. इसके अलावा गांधी मैदान में मां पटन देवी के विग्रह की झलक भी देखने को मिलेगी. आयोजकों के अनुसार, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े इस आयोजन में हर साल बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं.हिंदू-मुस्लिम एकजुटता की दिखेगी मिसालइस बार के आयोजन की खास बात सामाजिक सद्भाव भी है. दशहरा कार्यक्रम की तैयारियों में हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर सहयोग कर रहे हैं. आयोजन समिति का कहना है कि यह कार्यक्रम धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश भी देता है.गांधी मैदान के 12 गेटों पर तैनात होंगे मजिस्ट्रेटदशहरा के दिन उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं. गांधी मैदान के सभी12गेटों पर मजिस्ट्रेट तैनात किए जाएंगे. महिलाओं के लिए अलग दीर्घा बनाई जाएगी. इसके साथ ही बिजली, अग्निशमन और एम्बुलेंस जैसी जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि किसी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके.बच्चों की जेब में नाम-पता और मोबाइल नंबर की पर्ची रखने की अपीलश्री दशहरा कमिटी ट्रस्ट के चेयरमैन कमल निपानी ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को लेकर गांधी मैदान आएं तो उनकी जेब में नाम, पता और मोबाइल नंबर लिखी पर्ची जरूर रखें. इससे भीड़ में परिवार से बिछड़ने की स्थिति में बच्चों की पहचान करने और उन्हें परिजनों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी.आस्था, परंपरा और भाईचारे का संगमगांधी मैदान में होने वाला दशहरा आयोजन एक बार फिर धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सद्भाव का संगम बनेगा.90 फीट ऊंचे रावण का दहन, इको-फ्रेंडली आतिशबाजी और सुरक्षा की विशेष व्यवस्था इस बार के आयोजन की प्रमुख विशेषताएं होंगी.71 साल पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए श्री दशहरा कमिटी ट्रस्ट भव्य आयोजन की तैयारी में जुटा है.पटना से अंकिता सिंह की रिपोर्ट-
झारखंड के बीएड पास अभ्यर्थियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। झारखंड हाईकोर्ट ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्ति मामले में अभ्यर्थियों के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि सरकार और आयोग अपने ही तय किए गए नियमों से पीछे नहीं हट सकते। पूरा मामला साल 2016 का है। झारखंड सरकार ने 17,786 हाईस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला था। इसमें संस्कृत, उर्दू, फारसी और अरबी जैसे विषय भी शामिल थे। योग्यता को लेकर असमंजस की स्थिति थी, जिसे दूर करने के लिए राज्य सरकार ने जनवरी 2017 में आधिकारिक पत्र जारी कर पात्रता स्पष्ट की। इसके बाद जेएसएससी (JSSC) ने संशोधित विज्ञापन निकाला, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि संबंधित विषय में सिर्फ स्नातक (Graduation) और बीएड की डिग्री वाले अभ्यर्थी भी योग्य माने जाएंगे।लेकिन बड़ा मोड़ तब आया जब परीक्षा पास करने और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद, 21 जून 2023 को अचानक इन अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी यह कहकर खारिज कर दी गई कि उनके पास पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) या आचार्य की डिग्री नहीं है। अभ्यर्थी न्याय के लिए झारखंड हाईकोर्ट पहुंचे।न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए सरकार और JSSC को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जब सरकार ने खुद नियमों के तहत स्नातक की योग्यता को मंजूरी दी थी, तो चयन प्रक्रिया के बीच में या बाद में पीजी की नई शर्त थोपकर उम्मीदवारी रद्द करना पूरी तरह गलत है। सरकार अपने ही फैसले से पीछे नहीं हट सकती।हाईकोर्ट ने उम्मीदवारी खारिज करने वाले उस नोटिस को पूरी तरह रद्द कर दिया है। साथ ही, राज्य सरकार और जेएसएससी को यह सख्त निर्देश दिया है कि आदेश की प्रति मिलने के चार सप्ताह के भीतर सभी योग्य अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी स्वीकार कर उन्हें शिक्षक पद पर नियुक्ति दी जाए और सभी परिणामी लाभ भी प्रदान किए जाएं। इस फैसले से उन हजारों अभ्यर्थियों में खुशी की लहर है जो सिर्फ पीजी की डिग्री न होने की वजह से वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।
पटना : बिहार कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के वरिष्ठ अधिकारी राहुल कुमार को केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है. भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने उन्हें सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम के तहत केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, नई दिल्ली में निदेशक के पद पर नियुक्त किया है. इस नियुक्ति के बाद राहुल कुमार अब केंद्रीय स्तर पर अपनी प्रशासनिक सेवाएं देंगे.राहुल कुमार बिहार कैडर के2011बैच केIAS अधिकारी हैं. उनका जन्म3जून, 1987को हुआ था. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU), दिल्ली से कला विषय में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है. प्रशासनिक सेवा में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने बिहार सरकार के विभिन्न विभागों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं.फिलहाल बिजली वितरण कंपनी के एमडी हैं राहुल कुमारकेंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नियुक्ति से पहले राहुल कुमार बिहार में बिजली वितरण व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह2जून, 2025से नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) के प्रबंध निदेशक के पद पर कार्यरत हैं. इस पद पर रहते हुए वे कंपनी के प्रशासनिक कार्यों और विद्युत वितरण व्यवस्था से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी निभा रहे हैं.कई महत्वपूर्ण पदों पर कर चुके हैं कामराहुल कुमार अपने प्रशासनिक करियर में विशेष सचिव, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और निदेशक जैसे पदों पर भी काम कर चुके हैं. विभिन्न विभागों में कार्य करने के दौरान उन्हें प्रशासनिक प्रबंधन और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का अनुभव मिला है.केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में निदेशक के रूप में उनकी नियुक्ति को उनके प्रशासनिक करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है. अब वे केंद्र सरकार के स्तर पर मंत्रालय से जुड़े कार्यों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
राजधानी रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। योगदा सत्संग कॉलेज के सामने एक झोपड़ी से 28 वर्षीय युवक का क्षत-विक्षत शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है. मृतक की गर्दन रेती हुई थी और शरीर पर गंभीर चोट के निशान मिले हैं। परिवार ने हत्या की आशंका जताते हुए एक महिला पर गंभीर आरोप लगाए हैं।मृतक की पहचान गुमला जिले के सिसई थाना क्षेत्र के नागफेनी गांव निवासी 28 वर्षीय पवन सिंह के रूप में हुई है। पवन धुर्वा में योगदा सत्संग कॉलेज के सामने एक झोपड़ी में किराए पर रहता था।जानकारी के मुताबिक, पवन का मोबाइल फोन 14 अक्टूबर से ही बंद आ रहा था। इसके बाद, शुक्रवार 16 अक्टूबर की सुबह करीब नौ बजे उसके चचेरे भाई ने फोन पर सूचना दी कि झोपड़ी में एक युवक का शव मिला है। यह खबर मिलते ही मृतक की बहन प्रीति कुमारी अपने पड़ोसी मनीष कुमार के साथ सुबह करीब 11 बजे रिम्स पहुंची, जहां उन्होंने शव की पहचान अपने भाई पवन के रूप में की।बहन प्रीति का कहना है कि पवन के चेहरे पर सूजन थी और उसकी गर्दन पर धारदार हथियार से काटे जाने के स्पष्ट निशान थे। इसके अलावा, उसके गुप्तांग पर भी गंभीर चोटें थीं, जिससे यह साफ है कि हत्या बेहद बेरहमी से की गई है।इस खौफनाक वारदात के पीछे एक प्रेम प्रसंग और जबरन दबाव का मामला सामने आ रहा है। मृतक की बहन प्रीति ने पुलिस को दिए आवेदन में सीमा देवी और उसके अन्य साथियों पर हत्या का गंभीर आरोप लगाया है।प्रीति के अनुसार, सीमा देवी पहले से शादीशुदा है और वह पवन पर जबरन अपने साथ रहने का दबाव बनाती थी। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट भी की जाती थी। प्रीति ने यह भी दावा किया कि 8 अक्टूबर को उसने पवन को सीमा के साथ जगन्नाथपुर में देखा था। आरोप है कि सीमा अन्य लड़कों से भी बातचीत करती थी, जिसका पवन विरोध करता था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था।परिवार का मानना है कि हत्या एक या दो दिन पहले की गई होगी, और वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए हैं। बहन ने सीमा का मोबाइल नंबर भी पुलिस को सौंपते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल, पुलिस के सामने यह गुत्थी सुलझाने की बड़ी चुनौती है कि पवन की हत्या कब और किन परिस्थितियों में हुई। शव मिलने की जगह, मोबाइल का बंद होना और शरीर पर मिले जख्म पुलिस की जांच के अहम बिंदु हैं।पुलिस मृतक के कॉल डिटेल्स, आपसी विवाद और अन्य संपर्कों की गहनता से पड़ताल कर रही है। हालांकि, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह और इस क्रूर हत्याकांड में शामिल असली चेहरों का खुलासा हो सकेगा।धुर्वा थाना पुलिस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है।
झारखंड एकेडमिक काउंसिल यानी जैक (JAC) ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JETET) के सफल और कदाचार-मुक्त संचालन के लिए सभी जिलों को विस्तृत दिशा-निर्देश और एसओपी (SOP) जारी कर दी है।इस गाइडलाइन की मुख्य बातें।मोबाइल पर पूर्ण प्रतिबंध: परीक्षा केंद्र के अंदर केंद्राधीक्षक और स्टैटिक मजिस्ट्रेट को छोड़कर किसी भी कर्मचारी या परीक्षार्थी को मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं होगी।सीसीटीवी और वीडियो रिकॉर्डिंग: परीक्षा केंद्रों पर सभी सीसीटीवी कैमरों का चालू रहना अनिवार्य किया गया है। साथ ही, गोपनीय सामग्री खोलने की प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग मजिस्ट्रेट द्वारा मोबाइल से करनी होगी।ओएमआर शीट के नियम: यदि किसी परीक्षार्थी को कटी-फटी या त्रुटिपूर्ण ओएमआर शीट मिलती है, तो रिजर्व पैकेट से नई ओएमआर शीट देकर उसे परीक्षा में शामिल कराया जाएगा।रंग-विशेष में सीलबंद होंगे दस्तावेज: परीक्षा समाप्त होने के बाद दस्तावेजों को अलग-अलग रंगों के कपड़ों में सील किया जाएगा:इस्तेमाल की गई ओएमआर शीट: लाल रंग के कपड़े मेंबिना इस्तेमाल की गई ओएमआर शीट: सफेद रंग के कपड़े मेंउपस्थिति पत्रक (Attendance Sheet): हरे रंग के कपड़े मेंiअनुपस्थिति दर्ज करने का तरीका: वीक्षकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि अनुपस्थित (Absent) अभ्यर्थियों के कॉलम में लाल स्याही से 'Absent' लिखा जाए।कड़ी कार्रवाई की चेतावनी: परीक्षा में कदाचार करते पकड़े जाने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ 'झारखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम, 2023' के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।जैक का यह सख्त कदम परीक्षा में पारदर्शिता और शुचिता बनाए रखने की दिशा में एक अहम पहल है।
झारखंड के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान रिम्स में अब मेडिकल की पढ़ाई और इलाज के दरवाजे और ज्यादा चौड़े होने वाले हैं। जल्द ही रिम्स में सुपर स्पेशियलिटी की 44 नई सीटें जुड़ने जा रही हैं!इन 44 सीटों में एमडी (MD), डीएम (DM) और एमसीएच (MCh) की सीटें शामिल होंगी। ये बढ़ी हुई सीटें रिम्स में कई अत्याधुनिक और बेहद महत्वपूर्ण विभागों के शुरू होने से मिलेंगी। आइए आपको बताते हैं कि कौन-कौन से नए विभाग खुलने वाले हैं:गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (Gastroenterology)एंडोक्रिनोलॉजी (Endocrinology)क्लिनिकल हेमेटोलॉजी (Clinical Hematology)रूमेटोलॉजी (Rheumatology)न्यूरो एनेस्थीसिया (Neuro Anaesthesia)और कार्डियक एनेस्थीसिया (Cardiac Anaesthesia) विभाग।इन नए और विशेष विभागों को सुचारू रूप से चलाने के लिए कुल 30 फैकल्टी डॉक्टरों की जरूरत होगी, जिनकी नियुक्ति प्रक्रिया जल्द ही पूरी की जाएगी। इन विभागों के शुरू होने से न सिर्फ झारखंड के डॉक्टरों को सुपर स्पेशियलिटी की पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा, बल्कि राज्य के मरीजों को भी बेहतर इलाज मिल सकेगा। यह पूरी प्रक्रिया अभी कैबिनेट की मुहर का इंतजार कर रही है। सबसे पहले इन नए विभागों को शुरू करने का प्रस्ताव स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से झारखंड कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।कैबिनेट से हरी झंडी मिलते ही इन विभागों की स्थापना और फैकल्टी डॉक्टरों की नियुक्ति की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी जाएगी।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दिवंगत माता रूपी सोरेन का दशकर्म उनके पैतृक गांव नेमरा में पूरे पारंपरिक और धार्मिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत पूरा परिवार और देश भर से पहुंचे रिश्तेदार इस शोक सभा और अनुष्ठान में सम्मिलित हुए।शनिवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन नेमरा घाट से अपनी दिवंगत माता रूपी सोरेन का अस्थि-कलश लेकर अपने पैतृक आवास पहुंचे। यहां विधि-विधान के साथ अस्थि-कलश को आंगन में रखा गया, जिसके बाद संथाली रीति-रिवाजों के अनुसार दशकर्म की रस्में शुरू हुईं।सुबह ग्यारह बजे से आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार के सभी सदस्य शामिल हुए। इस दौरान नेमरा के मांझी हड़ाम प्रमुख हेमंत सोरेन प्रमाणिक हड़ाम, बीजू सोरेन, कुडूम हड़ाम, नाइके हड़ाम और चेतन टुडू ने संथाली परंपरा के मुताबिक सभी अनुष्ठान पूरे करवाए।दशकर्म के इस अवसर पर विधायक कल्पना सोरेन, रेखा सोरेन और परिवार की अन्य महिला सदस्यों ने मिलकर भोजन तैयार किया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी परिजनों के साथ पारंपरिक रूप से भोजन परोसने की रस्म में हिस्सा लिया।इसके बाद, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई में परिवार के सदस्य प्रसाद लेकर पास के तालाब पर पहुंचे। यहाँ बाल और नाखून कटवाने समेत मुंडन से जुड़ी पारंपरिक रस्में निभाई गईं। वहीं, परिवार की महिलाएं तालाब के दूसरी ओर बने पंडाल में धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हुईं। 'छूतका' उतारने की रस्म के बाद दशकर्म के बाकी विधि-विधान पूरे किए गए।दिवंगत रूपी सोरेन के दशकर्म में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से सगे-संबंधी और रिश्तेदार नेमरा पहुँचे थे। इस दौरान दयानंद सोरेन, परमानंद सोरेन, राहुल सोरेन, दिव्यांशु सोरेन, सतीश मुर्मू, जीतलाल टुडू और विनोद किस्कू के साथ-साथ मुख्यमंत्री के पुत्र नितिन सोरेन, अंश सोरेन, दिवंगत रूपी सोरेन की बेटियां, दामाद और अन्य परिजनों ने पारंपरिक अनुष्ठानों में पूरी श्रद्धा के साथ भाग लिया।
झारखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने और फैकल्टी की कमी को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के पांच प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में संविदा के आधार पर सह-प्राध्यापकों यानी एसोसिएट प्रोफेसर्स की नियुक्ति प्रक्रिया तेजी से शुरू कर दी गई है।स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी विज्ञापन के मुताबिक, कुल 65 रिक्त पदों पर नियुक्ति की जाएगी।इन 65 पदों में से 53 पद सामान्य नियुक्ति प्रक्रिया के तहत हैं, जिनमें अलग-अलग आरक्षण श्रेणियों के पद शामिल हैं।इसके अलावा 12 बैकलॉग पद भी रखे गए हैं।चयनित होने वाले सह-प्राध्यापकों को प्रति माह 2 लाख रुपये का आकर्षक मानदेय दिया जाएगा।यह नियुक्ति अधिकतम दो वर्षों के लिए होगी, जिसे संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ाया जा सकता है।इस पद के लिए अधिकतम उम्र सीमा 70 वर्ष तय की गई है, और उम्मीदवारों के पास राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के मानकों के अनुसार योग्यता होनी चाहिए।अगर आप इस पद के योग्य हैं, तो आपको अलग से लंबा फॉर्म भरकर भेजने की जरूरत नहीं है। इसके लिए सीधा वॉक-इन-इंटरव्यू आयोजित किया जा रहा है:तारीख: 23 अक्टूबरसमय: सुबह 10:30 बजे सेस्थान: रिम्स (RIMS), रांची का प्रशासनिक भवन
बोकारो के माराफारी थाना क्षेत्र के कर्नल मार्केट स्थित रांची मोहल्ले में गोली लगने से साढ़े तीन साल के मासूम बच्चे साहिल की मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बच्चे के मामा राजेश कुमार ने उसे खेलने के लिए लोडेड अवैध हथियार दिया था। इसी दौरान अचानक गोली चल गई, जिससे बच्चे की मौत हो गई।घटना के बाद मामा अवैध हथियार लेकर फरार हो गया घटना के बाद पूरे परिवार में मातम का माहौल है।घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच में जुट गई है। पुलिस बच्चे के मामा की तलाश कर रही है। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है।बच्चों की मां शोभा देवी ने बताया कि मेरा भाई घर आया तो बच्चे ने चॉकलेट मांगा तो उसने चॉकलेट के बदले खेलने के लिए खिलौना का कर हथियार दे दिया इसी दौरान बच्चे के हाथ से गोली चल गई और सीधे उसके माथे में लगी। महिला ने बताया कि उसके बाद भाई राजेश ने बच्चों को अस्पताल भी ले जाने का काम किया। राजेश बोकारो स्टील प्लांट के बाहर गाड़ियों को अंदर ले जाने के दौरान खलासी का काम करता है।माराफारी थाना प्रभारी संजय कुमार ने बताया कि घटना की जानकारी पुलिस को मिली तब मौके पर पहुंचकर मामले की जानकारी ली गई। घर वालों ने बच्चे के मां के द्वारा खिलौना कहकर हथियार देने की बात कही है।बच्चे से हथियार का ट्रिगर कैसे दबा यह जांच का विषय है। किस उद्देश्य से यह अवैध हथियार रखा गया था इसकी भी जांच की जाएगी।
झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के तहत नए मतदाता बनने के लिए अब तक 8 लाख 37 हज़ार से ज़्यादा आवेदन आ चुके हैं। इसके अलावा, नाम हटवाने के लिए 21 हज़ार 692 और विवरण सुधारने के लिए 5 लाख 33 हज़ार से ज़्यादा आवेदन दर्ज किए जा चुके हैं।ऐसे मेंअगर आपने अभी तक अपना नाम नहीं जुड़वाया है, तो आपके पास 31 अक्टूबर तक का सुनहरा मौका है। याद रखिए, आवेदन करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर है, और झारखंड की अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी!आइए, यह भी जान लेते हैं कि किस काम के लिए कौन-सा फॉर्म भरना है:फॉर्म-6: अगर आपको मतदाता सूची में अपना नया नाम जुड़वाना है।फॉर्म-6A: जो हमारे भारतीय मतदाता विदेश में रहते हैं, उनके लिए।फॉर्म-7: यदि किसी का नाम मतदाता सूची से हटवाना हो।और फॉर्म-8: अगर नाम, पता या किसी भी अन्य विवरण में सुधार कराना हो या अपना मतदान केंद्र स्थानांतरित करवाना हो।आवेदन की अंतिम तिथि है 31 अक्टूबर! लोकतंत्र को मज़बूत बनाएं, अपनी वोट की ताकत पहचानें
झारखंड की राजधानी रांची में दुर्गा पूजा के कई रंग देखने को मिलते हैं जहाँ की परंपरा देखकर आपका सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। बात हो रही है रांची के डोरंडा स्थित JAP-1 (झारखंड आर्म्ड पुलिस-1) परिसर की, जहाँ हर साल सजती है बेहद खास फूलपात्ती शोभा यात्रा! यह कोई आम उत्सव नहीं है, बल्कि 145 साल से भी अधिक पुरानी एक गौरवशाली परंपरा है! साल 1880 में शुरू हुई इस शक्ति उपासना को आज भी यहाँ तैनात गोरखा जवानों ने पूरी शिद्दत और अनुशासन के साथ जीवित रखा है। समय के साथ ब्रिगेड का स्वरूप बदला, लेकिन माँ दुर्गा के प्रति यह अटूट आस्था आज भी वैसी ही है.इस उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण होती है 'फूलपात्ती शोभा यात्रा'।शारदीय नवरात्र की सप्तमी तिथि को पवित्र पत्तों, विभिन्न प्रकार के फूलों और गन्ने के पौधों के इस अनूठे समूह यानी 'फूलपात्ती' को पूरे विधि-विधान और शान के साथ पूजा स्थल पर लाया जाता है। इस दौरान गूंजते पारंपरिक बैंड-बाजे और झूमते श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है.यहाँ की पूजा पद्धति भी बेहद खास है। यहाँ माँ दुर्गा की बड़ी मूर्तियों के बजाय कलश को ही देवी का मुख्य स्वरूप मानकर आराधना की जाती है। और सबसे रोमांचक पल तब आता है, जब महानवमी तक गोरखा जवान अपनी पारंपरिक खुकरी और आधुनिक हथियारों से माँ को शस्त्र सलामी देते हैं—यह नज़ारा वाकई रोंगटे खड़े कर देने वाला होता है! "सैन्य अनुशासन, नेपाली संस्कृति की अनूठी छाप और झारखंड की आत्मीयता का यह संगम रांचीवासियों के लिए हमेशा से मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा है। झारखंड से संदीप यादव की रिपोर्ट
दुर्गापूजा की धूम में शहर के पंडाल रोशनी से जगमगा रहे है लेकिन रुकिए... अगर आप भी यह सोच रहे हैं कि इस फेस्टिव सीजन में ट्रैफिक नियम तोड़ने पर पुलिस आपको छोड़ देगी, तो यह आपकी सबसे बड़ी भूल हो सकती है!"दुर्गापूजा के दौरान भी ट्रैफिक पुलिस की पैनी नजर शहर के चप्पे-चप्पे पर है। बिना हेलमेट बाइक चलाना, ट्रिपल लोडिंग करना या रेड लाइट जंप करना—अब भारी पड़ सकता है।शहर के सभी प्रमुख चौक-चौराहों पर लगे हाईटेक कैमरे 24 घंटे और सातों दिन सक्रिय हैं। अगर आप बिना हेलमेट के दोपहिया वाहन चला रहे हैं, सीट बेल्ट नहीं लगा रहे हैं, या सिग्नल तोड़ रहे हैं, तो इन कैमरों से बचना नामुमकिन है। नियम टूटते ही आपका ऑटोमेटिक चालान सीधे आपके घर या मोबाइल पर पहुंच जाएगा!""याद कीजिए पिछले साल के आंकड़े! सिर्फ 10 दिनों के भीतर—यानी 24 सितंबर से 3 अक्टूबर के बीच—यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले 29,600 वाहनों के चालान काटे गए थे।रांची के ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह ने साफ तौर पर वाहन चालकों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस बार भी कैमरे हर पल एक्टिव रहेंगे, इसलिए चालान की मार से बचने के लिए सतर्क रहें।"
झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2015 की कांस्टेबल नियुक्ति प्रतियोगिता परीक्षा से जुड़े एक मामले में राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग—यानी JSSC—से कड़ा जवाब तलब किया है। मामला जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सुना गया। अदालत ने सरकार और आयोग से यह स्पष्ट करने को कहा है कि जब अभ्यर्थियों ने शारीरिक, मेडिकल और लिखित—यानी तीनों चरण की परीक्षाएं पास कर ली थीं, तो फिर उनकी नियुक्ति क्यों नहीं की गई? प्रार्थियों के अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता ने अदालत को बताया कि JSSC ने विज्ञापन संख्या 4/2015 के तहत कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का रिजल्ट 17 दिसंबर 2016 को जारी किया था। आयोग ने 4,932 अभ्यर्थियों की अनुशंसा की थी, जिसमें से राज्य सरकार ने 4,892 लोगों को नियुक्ति पत्र दिए।लेकिन, गौर करने वाली बात यह है कि इस परीक्षा के तहत कुल 7,272 पदों पर भर्ती होनी थी, यानी अब भी 1,518 पद रिक्त पड़े हैं! अधिवक्ता ने यह भी हवाला दिया कि इसी परीक्षा से जुड़े एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गत 21 अगस्त 2026 को 862 अभ्यर्थियों को नियुक्त करने का स्पष्ट आदेश दिया था। इसी आधार पर, अविनाश कुमार और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने लिए भी नियुक्ति की मांग की है। फिलहाल, अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार और JSSC को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 9 दिसंबर को होगी। देखना यह होगा कि कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद सरकार और आयोग क्या जवाब देते हैं.
जैन धर्म के विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थल गिरिडीह जिले के मधुबन स्थित सम्मेद शिखरजी में भगवान पारसनाथ के दर्शन करने के लिए पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया अपने परिवार के साथ पहुंचे। उनके आगमन पर डुमरी स्थित पारसनाथ रेलवे स्टेशन पर प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान राज्यपाल को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।रेलवे स्टेशन से स्वागत कार्यक्रम के बाद राज्यपाल अपने परिवार के साथ जैन तीर्थस्थल मधुबन के लिए रवाना हुए, जहां उन्होंने भगवान पारसनाथ के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।मीडिया से बातचीत के दौरान गुलाबचंद कटारिया ने बताया कि मधुबन का यह उनका चौथा दौरा है। करीब ढाई से तीन साल के अंतराल के बाद उन्हें एक बार फिर इस पवित्र तीर्थस्थल पर आने का अवसर मिला है। इस बार वे अपने पूरे परिवार के साथ भगवान पारसनाथ के दर्शन करने पहुंचे हैं।इस दौरान राज्यपाल ने पारसनाथ और मधुबन के विकास को लेकर भी अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की। उन्होंने कहा कि तीर्थस्थल से लौटने के बाद वे यहां के विकास और सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार, झारखंड के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखेंगे।
पटना:भोजपुरी के शेक्सपियर,महान कवि,गीतकार एवं लोकगायक,नाई समाज की आन-बान-शान और बिहार के गौरव श्रद्धेय भिखारी ठाकुर जी के पौत्र सुशील कुमार ठाकुर जी को लोकभवन की नौकरी से हटाए जाने के मामले को लेकर विधान पार्षद डॉ. उर्मिला ठाकुर ने शुक्रवार को लोकभवन में महामहिम राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन साहब से मिलकर भिखारी ठाकुर के पौत्र को पुनः लोक भवन की नौकरी में रखे जाने की मांग की जिससे कि भिखारी ठाकुर जी का सम्मान बना रहे और उनके परिवार पर जो संकट की स्थिति आ गई है उससे उन्हें मुक्ति मिल सके. इस संबंध में पत्र लिखकर उन्हें न्याय देने की मांग की है. इस दौरान डॉ. उर्मिला ठाकुर ने महामहिम राज्यपाल को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया तथा सुशील कुमार ठाकुर जी को मानवीय दृष्टिकोण से उन्हें फिर से नौकरी में बहाल करने की मांग की. साथ ही इस मामले में न्यायसंगत एवं संवेदनशील पहल करने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि भिखारी ठाकुर जी ने अपनी कला,साहित्य और लोकसंस्कृति के माध्यम से बिहार को देश-दुनिया में बिहार का नाम गौरवान्वित किया है. ऐसे महान विभूति के परिवार को उचित सम्मान और न्याय मिलना चाहिए.भिखारी ठाकुर जी की विरासत का सम्मान और उनके परिवार को न्याय दिलाना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है. इस लड़ाई में हम पूरी मजबूती के साथ खड़े हैं.
Patna: पटना हाईकोर्ट ने द्वेषपूर्ण अनावश्यक मुकदमेबाजी पर कड़ा रुख अपनाया है. जस्टिस सोनी श्रीवास्तव ने द्वेषपूर्ण आपराधिक कार्रवाई को रद्द किया. व्यक्तिगत रंजिश के लिए आपराधिक न्यायशास्त्र के दुरुपयोग के खिलाफ एक कड़ा संदेश देते हुए,हाईकोर्ट ने एक शिकायत मामले से उत्पन्न संपूर्ण आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है.कोर्ट ने यांत्रिक न्यायिक कार्रवाइयों और पूर्व-संज्ञान वैधानिक सुरक्षा उपायों का पालन न करने की कड़ी निंदा की है.राकेश कुमार तिवारी बनाम बिहार राज्य व अन्य (आपराधिक विविध सं. 60085/2023) मामले में अपना विस्तृतCAVफैसला सुनाते हुए जस्टिस सोनी श्रीवास्तव ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी,पटना द्वारा पारित 5 मई,2025 के संज्ञान आदेश को निरस्त कर दिया. हाईकोर्ट ने पाया कि यह अभियोजन स्पष्ट रूप से निरर्थक,परेशान करने वाला और दुर्भावनापूर्ण था. इस विवाद की शुरुआत पुलिस जांच से लेकर विरोध याचिका तक कानूनी लड़ाई की शुरुआत विरोधी पक्ष संख्या 2 (शिकायतकर्ता) शीला तिवारी द्वारा 20 अक्टूबर,2022 को दर्ज कराई गई एक शिकायत से हुई थी. इसे बाद में सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत जांच के लिए भेजा गया और कदमकुआं थाना कांड संख्या 281/2023 दर्ज किया गया.हालांकि, एफिडेविट दर्ज होने के महज एक महीने के भीतर शिकायतकर्ता ने अपनी पुरानी शिकायतों का हूबहू दोहराव करते हुए एक विरोध याचिका दायर की. हाईकोर्ट के समक्ष मामला रद्द संबंधित याचिका के लंबित रहने के दौरान,पुलिस ने 30 अप्रैल,2024 को अंतिम रिपोर्ट (क्लोजर रिपोर्ट) सौंप दी,जिसमें मामले को झूठा पाया गया.निचली अदालत ने इस रिपोर्ट को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया. हालांकि,इसके साथ ही निचली अदालत ने लंबित विरोध याचिका को शिकायत मानकर बयान दर्ज किए और 5 मई,2025 को आईपीसी की धारा 384 (रंगदारी/extortion)के तहत संज्ञान ले लिया. तकनीकी बाधाओं को खारिज कर न्याय को प्राथमिकतासुनवाई के दौरान,विपरीत पक्ष द्वारा बाद के संज्ञान आदेश को चुनौती देने के लिए दायर अंतरिम आवेदन की पोषणीयता पर एक प्रारंभिक आपत्ति उठाई गई. तर्क दिया गया कि मूल एफआईआर की चुनौती अब निष्प्रभावी हो चुका है,इसलिए नई याचिका दायर की जानी चाहिए थी.सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक सिद्धांतों—जैसे सुगंधा बनाम पी. राजकुमार ((2020) 10SCC706) और कलेक्टर (LA)बनाम कातीजी ((1987) 2SCC107) का हवाला देते हुए जस्टिस श्रीवास्तव ने इस तकनीकी आपत्ति को खारिज कर दिया. हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता को सीआरपीसी की धारा 482 / बीएनएसएस की धारा 528 के तहत एक नया आवेदन दायर करने के लिए मजबूर करने से केवल मुकदमों की संख्या बढ़ेगी,कीमती न्यायिक समय नष्ट होगा और प्रक्रियात्मक देरी होगी,जबकि अदालत पहले से ही इस मामले पर गहराई से विचार कर रही थी.कोर्ट ने बेतुके आरोप और निर्दोषता का साक्ष्यमामलें के तथ्यों पर जस्टिस श्रीवास्तव ने याचिकाकर्ता राकेश कुमार तिवारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पूरी तरह से असंभावना को उजागर किया.शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि याचिकाकर्ता ने दिल्ली पुलिस को पार्लियामेंट स्ट्रीट थाना कांड संख्या 27/2022 की जांच के दौरान उसके पति के कार्यालय में तोड़फोड़ करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह आरोप पूरी तरह से सुदूर और काल्पनिक है,क्योंकि दिल्ली पुलिस दिल्ली में शुरू हुए एक अलग आपराधिक मामले में अपने स्वतंत्र वैधानिक कर्तव्यों का पालन कर रही थी.सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि अदालत ने रेखांकित किया कि घटना के समय याचिकाकर्ता न तो घटनास्थल पर उपस्थित थे और न ही पटना में थे. वह बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI)की नामांकन प्रक्रिया में भाग लेने के लिए मुंबई में मौजूद थे. कोर्ट ने नोट किया कि आईपीसी की धारा 384 (संपत्ति देने के लिए किसी व्यक्ति को नुकसान के भय में डालना) के मूल तत्व पूरी तरह से गायब थे,और यह धारा मूल प्राथमिकी का हिस्सा भी नहीं थी.इसके अलावा,निचली अदालत द्वारा जांचे गए गवाह पूरी तरह से मामले से जुड़े/हितबद्ध पक्ष थे—विशेष रूप से शिकायतकर्ता के पति और उनके कर्मचारी.जस्टिस श्रीवास्तव के निर्णय का एक मुख्य पहलू भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS)की धारा 223(1) के प्रावधानों के पूर्ण वैधानिक जनादेश पर केंद्रित था. उमर व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2026INSC1058) और कुशल कुमार अग्रवाल बनाम प्रवर्तन निदेशालय (2025SCC OnLine SC1221) में सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णयों का हवाला देते हुए,कोर्ट ने जोर दिया कि बीएनएसएस ने शिकायत पर संज्ञान लेने से पहले आरोपी को नोटिस जारी करने और सुनवाई का अवसर देने का एक महत्वपूर्ण वैधानिक प्रावधान पेश किया है.निचली अदालत से मँगवाई गई स्थिति रिपोर्ट से स्पष्ट रूप से यह सत्यापित हुआ कि 5 मई,2025 के संज्ञान आदेश से पहले याचिकाकर्ता को कोई नोटिस या समन जारी नहीं किया गया था. जस्टिस श्रीवास्तव ने फैसला सुनाया कि इस अनिवार्य प्रावधान को दरकिनार करना एक "गंभीर त्रुटि" है,जो प्राकृतिक न्याय और विधायी मंशा पर चोट करती है,जिससे यह आदेश प्रक्रियात्मक अनियमितता के बजाय कानूनी रूप से अमान्य हो जाता है.फ़ालतू मुकदमों को शुरुआत में ही कुचल दिया जाना चाहिएपेप्सी फूड्स लिमिटेड बनाम न्यायिक मजिस्ट्रेट ((1998) 5SCC749) और कृष्ण लाल चावला बनाम यूपी राज्य ((2021) 5SCC435) के ऐतिहासिक फैसलों का हवाला देते हुए,कोर्ट ने इस बात की कड़ी आलोचना की कि किस तरह विरोधियों को परेशान करने और व्यक्तिगत बदले लेने के लिए आपराधिक कानून मशीनरी का दुरुपयोग किया जाता है.सुब्रत रॉय सहारा बनाम भारत संघ का विस्तृत उल्लेख करते हुए जस्टिस श्रीवास्तव ने दोहराया कि जब कोई निर्दोष नागरिक अर्थहीन आपराधिक मुकदमों के जाल में फंसता है,तो उसे गहरा मानसिक,सामाजिक और वित्तीय कष्ट सहना पड़ता है.हरियाणा राज्य बनाम भजन लाल (1992Supp (1)SCC335) के लैंडमार्क मापदंडों—विशेष रूप से श्रेणियों (1), (5),और (7)—का उपयोग करते हुए,पटना हाईकोर्ट ने माना कि अभियोजन को आगे बढ़ाने की अनुमति देना अदालत की प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग होगा.यह निष्कर्ष निकालते हुए कि इस कार्यवाही को जारी रखने से न्यायिक समय की बर्बादी के अलावा कोई अन्य उद्देश्य पूरा नहीं होगा. जस्टिस श्रीवास्तव ने "...याचिकाकर्ता के खिलाफ पूरी आपराधिक कार्यवाही,जिसमें न्यायिक मजिस्ट्रेट,प्रथम श्रेणी,पटना द्वारा शिकायत मामला संख्या 15721(C)/2024 के संबंध में पारित आदेश दिनांक 05.05.2025 शामिल है,को एतद्द्वारा रद्द (quash)किया जाता है. तदनुसार, I.A. No.01of2025 के साथ यह वर्तमान आवेदन स्वीकार किया जाता है."पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-
झारखंड हाईकोर्ट से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अदालत ने मनरेगा घोटाले से जुड़े एक मामले में तत्कालीन ब्लॉक प्रोग्राम ऑफिसर को बड़ा झटका दिया है। झारखंड हाईकोर्ट ने मनरेगा योजना के तहत तीन लाख से अधिक के कथित गबन के मामले में तत्कालीन ब्लॉक प्रोग्राम ऑफिसर सुष्मिता प्रिया (उर्फ सुष्मिता गुप्ता) को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय की अदालत ने उनकी आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है। साल 2018 में मांडर थाने में कांड संख्या 109/2018 के तहत यह मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि मनरेगा के तहत जलेश्वर लोहरा की जमीन पर ट्यूबवेल निर्माण के लिए 3 लाख 11 हजार 244 रुपये स्वीकृत किए गए थे। लेकिन, निर्धारित स्थान पर काम न करवाकर राशि का दुरुपयोग किया गया। जांच के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की और ट्रायल कोर्ट ने आईपीसी की धाराओं के तहत इसका संज्ञान लिया था। अदालत में बचाव पक्ष के वकील मुकेश कुमार सिन्हा ने दलील दी कि सुष्मिता प्रिया मार्च 2010 से सितंबर 2012 तक संविदा पर तैनात थीं। उनका तर्क था कि स्थल निरीक्षण, जमीन की पहचान और सत्यापन की मुख्य जिम्मेदारी जूनियर इंजीनियर, हल्का कर्मचारी और मेट की होती है। याचिकाकर्ता की प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी और नियमों के तहत गलत जगह निर्माण होने पर राशि वसूली का प्रावधान है, इसलिए उन्हें आपराधिक मुकदमे से मुक्त किया जाना चाहिए।वहीं, राज्य सरकार के वकील ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि ब्लॉक प्रोग्राम ऑफिसर होने के नाते वे परियोजना की मुख्य निगरानी अधिकारी थीं।केस डायरी और संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने यह माना कि ब्लॉक प्रोग्राम ऑफिसर के दायित्वों में चल रही परियोजनाओं की नियमित निगरानी करना शामिल है, जिसका निर्वहन नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद बयानों और साक्ष्यों से उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आती है, और इसी के साथ अदालत ने उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी।
शुक्रवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पैतृक गांव नेमरा में सैकड़ों स्थानीय लोगों से मुलाकात की। इलाके के अलग-अलग गांवों से पहुंचे ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं मुख्यमंत्री के सामने रखीं और समाधान की गुहार लगाई।दोपहर करीब साढ़े बारह बजे, सीएम हेमंत सोरेन टावर चौक के पास बनाए गए पंडाल में पहुंचे। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से एक-एक कर मुलाकात की, उनकी बातें बेहद गौर से सुनीं और कई लोगों से उनकी परेशानियों से जुड़े लिखित आवेदन भी स्वीकार किए। ग्रामीणों ने अपने व्यक्तिगत, सामाजिक और जनहित से जुड़े कई अहम मुद्दे उनके सामने रखे। सीधे राज्य के मुखिया तक अपनी बात पहुंचाने का अवसर मिलने से आम जनता में एक नई उम्मीद जगी है।गौर करने वाली बात यह है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माताजी रूपी सोरेन के निधन के बाद से, वे गत 8 अक्टूबर से अपने पैतृक गांव नेमरा में ही हैं। यहां वे पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार अपनी माता के श्राद्ध कर्म और तमाम पारिवारिक परंपराओं को पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं।परिवार पर आए इस गहरे दुख और व्यस्त धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भी मुख्यमंत्री का इस तरह आम जनता से मिलना और उनकी समस्याएं सुनना इलाके में खासी चर्चा का केंद्र बन गया है। यह वाकया साफ तौर पर दर्शाता है कि एक तरफ जहां वे अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियां पूरी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से पीछे नहीं हट रहे हैं।व्यक्तिगत दुखों से ऊपर उठकर जनता के बीच रहना और उनकी सुधि लेना वाकई एक मिसाल है। झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इस जन-सरोकार की शैली की सराहना हो रही है।