ब्रेकिंग न्यूज़  
  • एडमिशन में अनियमितता को लेकर छपरा में छात्रों का बवाल, भारी संख्या में पुलिस तैनात

    छपरा । छपरा में आज छात्रों का गुस्सा ऐसा फूटा कि शहरभर में आगजनी कर दी। सड़कों पर ईंट और पत्थरों का टुकड़े नजर आ रहे थे। छात्रों ने जहां पाया वहीं पर गाड़ियों के शीशों को तोड़ डाला। की जगहों पर आगजनी की गय़ी। दरअसल एडमिशन में अनियमितता को लेकर छात्रों ने हंगामा किया। छात्र इतने आक्रोशित थे कि उन्होंने कई गाड़ियों को भी आग के हवाले कल दिया। इसके अलावा एक ट्रक को भी आग लगा दी।  

    आक्रोशित छात्रों ने पुलिस पर भी पथराव किया । छात्रों का आरोप है पुलिस ने कि हवाई फायरिंग की । जिससे एक व्यक्ति घायल हो गया । स्थिती को बिगड़ता देख भारी संख्या में पुलिस बल को वहां तैनात किया गया। पुलिस ने उपद्रवी छात्रों को दौड़कर पीटा और हालात को काबू में किया। वहीं भीड़ ने वहां खड़ी एक के शीशे तोड़ डाले और उसे फूंक दिया । ये पूरी घटना जगदम्बा कॉलेज की है ।  

  • सोने के बाद अब झारखंड में मिलेगी हीरे की खान !

    रांची। झारखंड में जमीन में अयस्कों का भंडार है। हाल ही में पाकुड़ में सोने का भंडार होने की खबर आयी और रघुवर सरकार की ओर से ये एलान भी किया गया कि वहां खुदाई होगी और सोने की खान को लेकर सर्च किया जाएगा। सोने पर चर्चा चल ही रही थी कि अब हीरे का खुलासा हो गया है । जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने कहा है की राज्य के सिमडेगा जिले में हीरे की खान है । दरअसल जीएसआई को यहां वैसे स्टोन मिले हैं जो हीरा बनाने के लिए जिम्मेदार होते हैं । इतना ही नहीं जीएसआई ने ये भी बताया है की तमाड़ में जहां सोने की खान मिली है वो एक किलोमीटर के दायरे में हैं । इसी रिपोर्ट पर खनन विभाग की ओर से बैठक की गई । जिसमें जीएसआई की रिपोर्ट पर चर्चा हुई । जिसके बाद उसे केंद्र सरकार को भेजा जायेगा ।

    बता दें कि रांची के पास तमाड़ में सोने की खान होने का अनुमान भी जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से किया गया है। पाकुड़ के पांच वर्ग किलोमीटर के इलाक़े में ड्रिलिंग का काम शुरू किया जाएगा । यहां पहले भी ड्रिलिंग की जा चुकी है।  उसमें वैज्ञानिकों को सोने का भंडार होने के लक्षण मिले थे । वे नमूने राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ही थे ।

  • मिसाइल मैन डॉ कलाम हुए सुपुर्द - ए- खाक

    रामेश्वरम। भारत के रत्न डॉ एपीजे अब्दुल कलाम आज पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द – ए – खाक कर दिए गए। । कलाम का पार्थिव शरीर रामेश्वरम में बुधवार को लाया गया और उन्हें यहां से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर मंडपम के पास पकारम्बू में दफनाया गया।मिसाइल मैन के नाम से मशहूर कलाम के अंतिम संस्कार में पीएम मोदी के अलावा कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडूके अलावा कई राज्यों के मुख्यमंत्री और साथ ही तमिलनाडु सरकार के नेता और मंत्री शामिल हुए। तीनों सेनाओं के सेनाध्यक्षों ने भी डॉक्टर कलाम को श्रद्धांजलि दी। हालांकि अंतिम यात्रा में तमिलनाडु की खराब स्वास्थ्य की वजह से मुख्यमंत्री जयललिता नहीं पहुंच सकीं । लेकिन उनकी ओर सें तमिलनाडु सरकार के 7 मंत्री मौजूद थे। इन बड़े लोगों के अलावा कलाम की अंतिम यात्रा में आम लोग भी काफी संख्या में मौजूद थे। गुरुवार सुबह मदुरई सेरामेश्वरम केलिए एक स्पेशल ट्रेन भीआम लोगों के लिए चलाई गईताकि लोग वहां पहुंच सकें। डॉ कलाम को की अंतिम यात्रा के लिए सरकार की र से हर तरह के इंतजाम किए गए थे और इसकी जिम्मेवारी बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैनकते कंधों पर दी गई थी। वे बुधवार की सुबह हीरामेश्वरम पहुंच चुके थेऔरवह केंद्र सरकार की ओर से वहां तमाम इंतजाम देख रहे थे।अंतिम संस्कार पूरा होने के क्रम में ही श्रद्धांजलि देकर पीएम डॉ कलाम के बड़े भाई से मिले और उन्हें ढ़ाढस बंधाया। तिरंगे में लिपटा डॉ कलाम के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शनों के लिए युवाओं और छात्रों का काफी भीड़ देखी गय़ी।

    देश को पहला उपहग्रह PSLV 3 को बनाने में कलाम का अहम योगदान रहा। पृथ्वी और अग्नि जैसी मिसाइलों को बनाने में खास योगदान के अलावा अलावा 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण कोभी उन्होंनेलीड किया।जिसे देश कभी भूल नहीं सकता। डॉ कलाम साहब की यादें हर भारतीय के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगीं।       

    यहां बता दें किडॉ. कलाम का सोमवार को IIM शिलांग मेंलेक्चर देने के दौरान हीदिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। जिसके बाद दूसरे दिन उनकेशव दिल्ली  में उनके आवास राजाजी मार्ग में अंतिन दर्शषन के लिये रखा गया था। जहांराष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री समेत बड़ी संख्या में लोगों ने श्रद्धांजलि दी।गुरूवार सुबह 11 बजे पूरे राजकीय सम्मान के साथ रामेश्वरम के निकट उनका अंतिम संस्कार किया गया।  

  • अपनी पार्टी को निशाना बनाते शॉटगन

    पटना। बिहारी बाबू के नाम से मशहूर भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा के तेवरों में इन दिनों गजब का बदलाव आया है। नमो की छत्रछाया में चुनाव तो एकबार फिर जीतकर सांसद बन गये। लेकिन मोदी के मंत्रिमंडल में कोई जगह ना पाने की टीस रह – रह कर उनके मन में उठती रहती है। lतभी तो रूक – रूक कर वे पार्टी को झटके भी देते रहते हैं। बिहार चुनाव की सुगबुगाहट के बीच अब शत्रुघ्न सिन्हा भी पूरी तरह से एक्टिव नजर आने लगे हैं। राजनीति में सक्रियता का बिल्कुल स्पष्ट उदाहरण वे पेश कर रहे हैं।

    तभी तो आये दिन वे चर्चा का विषय बने रहते हैं। सबके जेहन में बस एक ही सवाल इस वक्त कौंध रहा है कि ऊंट किस करवट बैठेगा। आन बातों को किसी पहेली  जैसा समझ रहे होंगे। लेकिन सच्ची यही है। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिहार दौरे के दौरान दिन में पीएम के साथ मंच साझ करने वाले शॉटगन ने देर शाम होते अपनी ही पार्टी पर निशाना साध डाला। देर शाम शत्रु ने नीतीश कुमार से मुलाकात कर उनके साथ चाय की चुस्कियों के साथ बातचीत की। चाय और मुलाकात खत्म होते ही जब वे बाहर आये तो नीतीश कुमार की तारीफों के पुल बांधने के साथ ही पीएम के उपर ही निशाना साध बैठे। नीतीश कुमार को अक्लमंद और काबिल बताने वाले शॉटगन ने तारीफों के इतने पुल बांधे कि अटकलों और कयासों का बाजार गर्म हो गया। लेकिन फिर अगले ही दिन बिहारी बाबू ने अपनी मासूम सफाई पेश करते हुए इस बात से पल्ला झाड़ लिया कि मुलाकात भर से चीजें बदल नहीं जाती हैं। सफाई देते हुए शॉटगन ने कहा था कि बीजेपी में था....बीजेपी में हूं....मगर बीजेपी में ही रहूंगा कहने से पहले इंशाअल्लाह जोड़ दिया...यानि ऊपरवाले की मर्जी हुई तो। ये बात तो यहीं खत्म हो गई । सारे कयास भी यहीं खत्म हो गये।

    लेकिन अटकलों को एकबार फिर शॉटगन ने ही हवा दे दी। इस बार तो वे नीतीश कुमार का स्वागत करने के ले सीधे एयरपोर्ट ही पहुंच गये। दरअसल सीएम नीतीश कुमार डॉ कलाम को श्रद्धांजलि देकर दिल्ली से पटना लौटे तो पटना एयरपोर्ट पर बिहारी बाबू उनके स्वागत के लिए पहले से ही मौजूद थे। हाथ मिलाकर हंसते हुए उन्होंने कुछ बातें भी कीं। इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारे में ऐसी हवा चल रही है कि आखिर शत्रु किसके शत्रु हैं।    

    शत्रुघ्न सिन्हा के नीतीश प्रेम या कहें उनकी मोदी के प्रति उदासीनता को समझने के लिए थोड़ा फ्लैशबैक में जाना पड़ेगा।बीजेपी के भीतर प्रधानमंत्री पद के लिए नरेन्द्र मोदी की उम्मीदवारी तय होने के दौर की कई अंतर्कथाएं हैं। बीजेपी का एक खेमा मोदी को रोकने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहा था। बताया जाता है कि इस खेमे की कमान आडवाणी के हाथ में थी और शत्रुघ्न सिन्हा उसी खेमे के योद्धा। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से मान लिया गया है कि ढलती उम्र के आडवाणी ने उम्मीदें छोड़ दी हैं। लेकिन फिल्मी अंदाज वाले शत्रुघ्न सिन्हा मोदी के प्रति अपनी उदासीनता को जब-तब जाहिर करते रहते हैं। 

  • बढ़ रहा है 'हम' का दम

    देश के मिसाइल मैन डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की अचानक मृत्यु से पूरा देश दुखी है। इसके साथ ही दो दिनों से देश की रफ्तार भी थोड़ी धीमी सी पड़ गई है। इसका असर बिहार में भी दिखा।  बिहार में जहां चुनाव की राजनीति का पहिया सरपट दौड़ रहा था, उस दौड़ में दो दिनों से थोड़ा धीमापन देखा गया। लेकिन बुधवार को उस रफ्तार में थोड़ी तेजी दिखी और इसके साथ ही दिखायी दिया हम का दम। जी हां पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा यानि हम को राजनीतिक दल के रुप में चुनाव आयोग से मान्यता मिल गई । इसी के साथ अब मांझी अपनी पार्टी का चुनाव चिन्ह चुनने का हक भी मिल गया। फिलहाल उन्होंने गुलाब, चापाकल , खटिया और पंखा को चुनाव चिन्ह बनाने के आयोग के सामने अर्जी लगायी है। बस अब आयोग की हामी किस पर होती है , मांझी इसी के इंतजार में हैं।  पार्टी को आयोग की ओर से हरी झंडी मिलने के साथ ही अब वे बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के सामने पूरे दम – खम के साथ उतरेंगे। राजनीति में नीतीश कुमार को अपना सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी मानने वाले मांझी की पार्टी को अब हर ओर से दम मिल गया है। तभी तो बीते दिनों के बाहुबलि और कोसी इलाके के राजपूत क्षत्रप आनंद मोहन सिंह की पत्नी लवली हम में शामिल हो गई हैं । वहीं मांझी की संगत में पहले से ही चार चांद लगा रहे पप्पू यादव तो हर कदम पर उनके साथ हैं।  भोले दिखने वाले मांझी के दोनों हाथ चुनाव से पहले ही काफी वजनदार हो गये हैं। जो RJD- JDUके वोट बैंक को प्रभावित करने को तैयार हैं। राजपूत , यादव और महादलित मिलाकर सीमांचल में जो पोलटिक्स तैयार होगा ,उसका असर देखने लायक होगा ।

    दरअसल बिहार की राजनीत में अब हम का दम जनता पूरी तरह से देखेगी और इस सफर की शुरूआत मांझी के पॉलिटिकल करियर से हुई। हम यानि हिंदूस्तानी आवाम मोर्चा के मुखिया जीतन राम मांझी के सफर 1980 में गया जिले के बाराचट्टी विधानसभा सीट से शुरू हुआ । मांझी का राजनीतिक सफर 2015में क्लाइमेक्स और एंटी क्लाइमेक्स के बीच अटखेलियां कर रहा है । इसके साथ ही अब एक सवाल भी  बिहार की राजनीति में मजबूती के साथ खड़ा हो चुका है कि मांझी चुनावी राजनीति के क्लाइमेक्स को किस हद तक प्रभावित करेंगे । महादलित राजनीति के जनक नीतीश कुमार भी हैरान होंगे कि मांझी अब महादलितों के पोस्टरब्यॉय बन चुके हैं ।

    मांझी ने चूहे को चिकेन के बराबर पौष्टिक बताकर दूनिया का ध्यान खींचा था । मुखतलिब मौके पर इस तरह के बयान देकर मांझी ना सिर्फ उपहास का विषय बने बल्कि समाज के निचले तबके को देखने समझने का एक अलहदा नुख्ता-ए-नजर भी पेश किया और अब अपने आप को हम में तब्दील करते हुए दिग्गजों का सरदर्द बनते जा रहे हैं । 1980 से 2015 तक कई राजनीतिक पार्टियों की नौकाओं की सवारी कर चुके मांझी ने अपनी नैया चुनाव की लहरों में उतारा है। ये लहरें काफी उंची हैं , लेकिन नैया को थामने के लिए मांझी की नैया पर भी सियासी ताकतें आनी शुरू हो गयी हैं,  जो उसे चुनाव की वैतरणी से पार ले जाय़ेंगी।  



 
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