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  • जीरो से शुरू कर हीरो बना जापान...........संपादक प्रवीण बागी की कलम से...

    जापान के कॉन्सुलेट जनरल मासायुकी तागा 16 जनवरी को  रांची आये थे। उन्होंने डिनर पर आमंत्रित किया था। झारखंड -बिहार से लेकर जापान तक के बारे में ढेर सारी बातें हुईं। बातचीत के क्रम में ही उन्होंने बताया कि जापान में पिछले 60 वर्षों में कोई रेल दुर्घटना नहीं हुई है। जबकि हर दो से तीन मिनट पर वहां एक ट्रेन गुजरती है। जापान ने अभी 600 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ़्तार से ट्रेन चलाकर विश्व में एक कीर्तिमान स्थापित किया है। जापान में और भी अनेक ऐसी अजूबी चीजें हैं।...
     

    क्या हम ऐसी कल्पना भी कर सकते हैं ? जवाब होगा नहीं। क्यों ? क्योंकि हमने अपने देश को ऐसा बनाया नहीं या यह भी कह सकते हैं की बनने नहीं दिया। 1945 में अमेरिका ने एटम बम गिराकर पूरे जापान को नेस्तनाबूद कर दिया था। वहां के लोगों ने जीरो से शुरू किया था और पूरी दुनिया के हीरो बन गए। हम 1947 में आजाद हुए। उस समय देश में बहुत कुछ था। हमें जीरो से शुरू नहीं करना था। फिर भी हम पिछड़ गए। चूक कहाँ हुई ,यह फिर कभी। 
    अभी हम सिर्फ मायासुकी तागा और उनके देश की ही बात करेंगे। मैंने उनसे पूछा कि उद्योग -धंधे में जापान इतना आगे कैसे निकल गया ? उन्होंने बताया की जापान में उद्यमियों का स्थान बहुत ऊँचा है। सरकार उद्यमियों के पीछे खड़ी रहती है। उनपर भरोसा करती है। देश में उनका सम्मान है। ब्यूरोक्रेसी सरकार के पीछे रहती है। यानी सरकार चुने हुए राजनेता चलाते हैं। नौकरशाही सरकार नहीं चलाती। उद्यमी इंजन की भूमिका में होते हैं। इंजन ठीक से काम करता रहे ,इसका ध्यान सभी रखते हैं। उद्यमी भी देश हित को ध्यान में रखकर काम करते हैं। 
    अपने यहाँ ठीक इसका उल्टा है। राजनेता और नौकरशाह  उद्यमी का दोहन करते रहते हैं। सारी गड़बड़ी यहीं से शुरू होती है। राजनेता और अधिकारी जापान जाते रहते हैं। लेकिन वहां की खूबियां नहीं देखते। उसे अपने यहाँ लागू करने की नहीं सोचते। सिर्फ सैर -सपाट कर वापस आ जाते हैं। जबतक हम श्रम और बुद्धि का सम्मान करना नहीं सीखेंगे तबतक स्थिति बदलनेवाली नहीं। 

    जापानी कॉन्सुलेट जनरल से चल रही बातचीत फिर घूम कर रेल पर आ गई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत में बुलेट ट्रेन चलाने के लिए बहुत उत्सुक हैं। इसके लिए जापान से करार हुआ है। मिस्टर तागा ने बताया कि भारत में बुलेट ट्रेन चलाने की दिशा में बहुत तेजी से काम चल रहा है।और अपने तय समय में वह परियोजना पूरी होगी। उन्होंने यह भी बताया कि जापानी प्रधानमंत्री और भारतीय प्रधानमंत्री के बीच बहुत अच्छी ट्यूनिंग है। जापान और भारत की मित्रता बहुत पुरानी है। 

    श्री तागा का मुख्यालय कोलकाता है। झारखंड ,बिहार ,बंगाल और उड़ीसा उनका कार्य क्षेत्र है। जापान के आर्थिक हितों के  संरक्षण और विकास को गति देना उनकी मुख्य जिम्मेवारी है। कोलकाता में जापानी कॉन्सुलेट का दफ्तर भारत में सबसे पुराना है। 1907 में यह खुला था। यानी यह कॉन्सुलेट कार्यालय सौ साल से भी पुराना है। आजादी के बाद दूसरे प्रदेशों में भी जापानी कॉन्सुलेट कार्यालय खुले। इससे यह पता चलता है कि जापान की भारत में गहरी रूचि है। भारत की आजादी की लड़ाई में भी जापान का सहयोग रहा है। जापान के सहयोग से ही नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने आजाद हिन्द फ़ौज का गठन किया था। नेताजी ने जो आजाद हिन्द सरकार गठित की थी उसे सबसे पहले जापान ने ही मान्यता दी थी। 

    झारखंड में अगले महीने ग्लोबल इन्वेस्टर मीट होनेवाला है। श्री तागा के रांची आने का मकसद झारखण्ड में जापानी उद्यमियों द्वारा पूंजी निवेश की संभावनाएं तलाशना था। इस ग्लोबल मीट में भारत में जापान के राजदूत और वहां के कई उद्योगपति भी शामिल होंगे ,ऐसा श्री तागा ने हमें बताया। वे राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू और मुख्यमंत्री रघुवर दास से भी मिले। रघुवर सरकार के बारे में उन्हें अलग -अलग क्षेत्रों से अच्छा फीडबैक मिला है। इस फीडबैक को वे जापानी उद्यमियों तक पहुंचाएंगे। उन्होंने झारखंड चैंबर ऑफ़ कामर्स के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। उनसे जानना चाहा कि किस क्षेत्र में यहाँ पूंजीनिवेश किया जा सकता है। इससे यह उम्मीद जगती है की जापान झारखण्ड में पूंजीनिवेश के लिए उत्सुक है। रांची के निकट जमशेदपुर में जापानी कंपनी हिटाची टाटा के साथ मिलकर पहले से काम कर रही है। इसलिए झारखण्ड जापानियों के लिए नया नहीं है। 

    लेकिन मूल सवाल संरचनात्मक ढांचे का है। जब श्री तागा ने जानना चाहा कि क्या जमशेदपुर -रांची और कोलकाता के बीच विमान सेवा है ,मैं इसका जवाब नहीं दे सका। दूसरा सवाल उन्होंने यह पूछा की रांची से जमशेदपुर सड़क मार्ग से जाने में कितना समय लगेगा ,इसका भी मुझे गोलमोल जवाब देना पड़ा। क्योंकि रांची -टाटा के बीच की सड़क का एक हिस्सा ज़माने से ख़राब है। करीब -करीब दोगुना समय लग जाता है। यही स्थिति बरही के पास है। 

    बिजली और पानी को लेकर भी समस्याएं हैं। जबतक विधि -व्यवस्था, यातायात ,बिजली -पानी और दोस्ताना माहौल नहीं होगा तबतक विदेशी या देशी पूंजीनिवेश नहीं होगा। झारखण्ड के साथ सकारात्मक बात यह है की सरकार इन मुलभूत चीजों पर ध्यान दे रही है। राज्य गठन के बाद पहलीबार पूर्ण बहुमत और त्वरित फैसले लेनेवाली सरकार बनी है। समय बताएगा की झारखण्ड को इसका कितना लाभ मिल पाता है।  
     
    जीरो से शुरू कर हीरो बना जापान...........संपादक प्रवीण बागी की कलम से...
  • 1 अप्रैल से बिहार में शराब बनाने वाली फैक्ट्रियां होंगी बंद

    पटना.राज्य की तमाम शराब फैक्ट्रियां 1 अप्रैल से बंद हो जाएंगी। मंगलवार को राजगीर के इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में हुई बैठक में कैबिनेट ने वर्ष 2017-18 में शराब फैक्ट्रियों का लाइसेंस रिनुअल नहीं करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। कंपनियां चाहे तो कोई और पेय पदार्थ बनाए...
     
     
    बिहार में बियर बनाने की तीन, विदेशी शराब बनाने की 12 और इथेनॉल बनाने की छह फैक्ट्रियां हैं। सरकार ने यह प्रस्ताव दिया है कि प्रबंधन चाहे तो फैक्ट्रियों में कोई अन्य पेय पदार्थ या उत्पाद बना सकता है। इसके लिए सरकार उन्हें एनओसी देगी। कैबिनेट विभाग के प्रधान सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने बताया कि बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम 2016 के तहत सरकार ने बिहार में अनाज आधारित आसवनी से ई.एन.ए. निर्माण और विदेशी शराब निर्माण व इसके बॉटलिंग प्लांट को मिले लाइसेंस का वर्ष 2017-18 में नवीकरण नहीं किया जाएगा।
     
    पटना में बनेगा आईटी पार्क
    पटना के डाकबंगला के पास सरकार ने आईटी पार्क बनाने का फैसला लिया है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत शिक्षकों के केंद्रीय अंश नहीं मिला है। फिर भी सरकार ने अपने स्तर से 2100 करोड़ की स्वीकृति दे दी है। इसके साथ ही जो पंचायत पहले शौच मुक्त होगा उस गांव में उच्च माध्यमिक स्कूल खोलने की प्राथमिकता दी जाएगी। बैठक को लेकर सीएम नीतीश कुमार सोमवार को ही राजगीर पहुंच गए थे। मंगलवार को कई मंत्री बस से शामिल होने के लिए राजगीर पहुंचे।
     
  • गढ़वा - कंबल नहीं मिलने से SDO ऑफिस में ठंड़ से महिला की मौत, CM ने मांगी रिपोर्ट

    रांची।गढ़वा में कंबल नहीं मिलने से लगी ठंड के बाद हुई एक बुजुर्ग महिला की मौत पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मंगलवार को गृह एवं आपदा विभाग से रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने वरीय अधिकारियों को पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री द्वारा की गई इस कार्रवाई से आपदा एवं प्रबंधन विभाग में हड़कंप मच गया है। क्या है मामला...?
     
     
     
    - गढ़वा में एक 80 साल की बुजुर्ग महिला पांच दिनों तक कलेक्ट्रेट का चक्कर लगाती रही, लेकिन उसे कंबल नहीं मिला। ठंड लगने से एसडीओ ऑफिस के बाहर उसकी मौत हो गई।
     
    - मजदूर पेशा भतीजे सुरेश बिंद ने कहा, चाचा रहे नहीं। उनका बेटा बंगाल में मजदूरी करता है। चाची किसी तरह गुजारा कर रही थी। पंद्रह दिन से यही कहकर घर से निकलती थी कि सरकारी दफ्तर कंबल लेने जा रही हूं। रोजाना खाली हाथ लौटती थी।
     
    - गढ़वा के एसडीओ राकेश कुमार ने कहा था, वृद्धा की मौत उल्टी करने के बाद हुई। उन्हें नहीं पता कि वृद्धा क्यों रोज उनके दफ्तर आ रही थी।
     
    - राज्य सरकार ने एक महीने पहले लाखों कंबल पूरे राज्य में बांटने भेजे थे। इनमें तीस हजार गढ़वा जिले को मिले थे।
     
    - सामाजिक सुरक्षा सहायक निदेशक पीयूष कुमार सिर्फ इतना कहते हैं, बीडीओ और वार्ड मेंबर के जरिए ये कंबल बांटे जाते हैं। जब एसडीओ दफ्तर आने वाली बेसहारा को पंद्रह दिन में भी कंबल नहीं मिला तो गरीब बस्तियों में किसे मिल रहे होंगे, यह भी जांच का विषय है।
  • मोतिहारी पुलिस का खुलासाः कानपुर रेल हादसे की तार दुबई से जुड़े होने के मिले संकेत

    पटना.उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुए हादसे की तार दुबई से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। मोतिहारी पुलिस की गिरफ्त में आए तीन अपराधियों ने मंगलवार को ये खुलासा किया है। बताते चलें कि इंदौर से पटना जा रही ट्रेन इंदौर-राजेन्द्र नगर एक्सप्रेस पिछले साल 20 नवंबर में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इसमें 142 लोगों की मौत हो गई थी। मोतिहारी पुलिस ने किया ये खुलासा...
     
    - मोतिहारी के घोड़ासान रेल हादसे का मुख्य अभियुक्त मोति पासवान समेत तीन लोगों को मोतिहारी पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार कर लिया था।
    - रेल ट्रैक को बम से उड़ाने के लिए ट्रैक पर बम लगाए गए थे।
    - पुलिस की सक्रियता से इस असफल कर दिया गया था।
    - मोति पासवान ने पुलिस को बताया कि दुबई का अप्रवासी और नेपाल का कारोबारी शमशुल होदा ने हम लोगों को ट्रेन को दुर्घटनाग्रस्त करने की जिम्मेवारी सौंपी थी।
    - घोड़ासान में 01 अक्तूबर को ट्रेन दुर्घटना के टल जाने पर के बाद हम लोगों को कानपुर इंदौर पटना ट्रेन को उड़ाने की जिम्मेवारी दी गयी थी।
    - होदा के कहने पर ही हम लोग कानपुर में इंदौर पटना एक्सप्रेस को दुर्घटनाग्रस्त किया था।
    - इस घटना को अंजाम देने के लिए हम लोगों को एक बड़ी रकम दिए गए थे।
     
    आईएसआई के लिए काम करता है शमशुल होदा
    -मोति पासवान ने पुलिस को यह संकेत दिए हैं कि शमशुल होदा आईएसआई के लिए काम करता है।
    -उसके नेटवर्क में कई बड़े आतंकवादी भी हैं, जिसने हम लोगों को घटना को अंजाम देने के लिए संसाधन और पैसे दिए थे।
    - मोतिहारी के एसपी जितेंद्र राणा ने कहा कि मोति पासवान को केंद्रीय खुफिया विभाग की कई एजेंसी पूछताछ कर रही हैं।
  • लचर तंत्र की देन है नौका हादसा....संपादक प्रवीण बागी की कलम से.......

    इसमें कोई शक नहीं की पटना में हुए  नौका हादसे ने बिहार की छवि धूमिल की है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पीड़ा और आक्रोश जायज है। गुरु गोविन्द सिंह जी महाराज के 350 वें प्रकाश पर्व और बोधगया में कालचक्र पूजा के अत्यंत सफल आयोजन ने पूरे देश और दुनिया में बिहार की जो उज्जवल छवि गढ़ी थी ,वह एक झटके में धराशायी हो गई। चंद अधिकारियों की लापरवाही बहुत भारी पड़ी। जो अमूल्य जीवन गंगा की धार में गुम हो गए ,उनके परिजनों की चीत्कार ने मुख्यमंत्री को भीतर तक आहत किया है। उनका यह दर्द आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में छलका। अधिकारियों की लापरवाही को लेकर उनका  आक्रोश भी दिखा। मुख्यमंत्री का आहत होना और आक्रोश में आना दोनों जायज है। अधिकारियों की लापरवाही ने पूरे सरकार को कठघड़े में खड़ा कर दिया है।
    राजनीतिक आरोप -प्रत्यारोप अपनी जगह, लेकिन हर कार्यक्रम की निगरानी मुख्यमंत्री के स्तर पर हो, यह न संभव है न उचित है। बिहार ही नहीं पूरी दुनिया में ऐसे हादसे होते रहते हैं। लेकिन ऐसी लापरवाह अफसरशाही शायद ही कहीं देखने को मिले। प्रारंभिक तौर पर जो सूचनाएं सामने आई हैं,उससे यह दुर्घटना सीधे-सीधे प्रशासनिक लापरवाही की  लगती है। जाँच के बाद पूरी वजह सामने आयेगी ,यह उम्मीद की जानी चाहिए।
    यही तंत्र ,यही अधिकारी ,यही पुलिस बल जिसने प्रकाशपर्व के सफल आयोजन की वाहवाही बटोरी थी। फिर 10 ही दिन में ऐसा क्या हो गया कि इतना बड़ा हादसा हो गया ? तंत्र क्यों शिथिल हो गया ? लाखों की भीड़ सम्हाल ली लेकिन कुछ सौ की भीड़ नहीं सम्हाल पाये ? चूक कहाँ हुई ? इसका सही सही जवाब मिलना जरुरी है। ताकि सही तरीके से उसकी समीक्षा हो सके।
    फिर भी मोटे तौर पर यह कहा जा सकता है कि पर्यटन विभाग और उसका निगम 25 मौतों के लिए जिम्मेवार है। बिना पूरी तैयारी के कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सुरक्षा के उपाय नहीं किये गए थे। जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को कार्यक्रम में सहभागी नहीं बनाया गया था। बीच नदी में कार्यक्रम का आयोजन किया गया , लेकिन लोगों को लाने और ले जाने की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। जो नाव डूबी उसपर  क्षमता से अधिक लोग कैसे चढ़ गए ? साफ है कि वहां कोई नियंत्रण व्यवस्था नहीं थी ? इसमें नाविक और आम लोग भी अपनी जिम्मेवारी नहीं समझ सके। क्षमता से अधिक लोग चढे क्यों ? बिहार में  जान जोखिम में डाल कर सफर करना लोगों की मज़बूरी भी है और सगल भी। कभी -कभी यह भारी पड़ जाता है।
    इस दुर्घटना से यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य का प्रशासनिक तंत्र अपने बल बूते काम करने ,जिम्मेवारी निभाने के लायक नहीं है। उसमें क्षमता है ,लेकिन इच्छाशक्ति नहीं है। प्रकाशपर्व के सफल आयोजन के पीछे नीतीश कुमार की इच्छाशक्ति थी। वे खुद मॉनेटरिंग कर रहे थे। इसलिए अधिकारी सक्रिय थे। शायद अधिकारियों में सीएम का खौफ था,इसलिए वे सक्रिय थे। रात -दिन एक पाँव पर खड़े थे। यानी नौकरशाही के सर पर कोई तलवार लटकती रहे तो वह अपनी जिम्मेवारी समझ कर काम करेगी। तलवार हटते ही अधिकारी आराम की मुद्रा में आ जाते हैं। यह प्रवृति घातक है। इससे न सिर्फ दुर्घटनाएं होती रहेंगी  बल्कि विकास भी बाधित होता रहेगा। अधिकारियों की यह मनोदशा बदलने की जरुरत है। इसके लिए लापरवाह अधिकारियों / कर्मचारियों को कठोर दंड दिया जाना चाहिए। एक मजबूत मैसेज सरकारी तंत्र / नौकरशाही में जाना चाहिए कि मौज -मस्ती के दिन अब गए। क्या सरकार इसके लिए तैयार है ?


    प्रवीण बागी, संपादक, कशिश न्यूज

 
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